अलीनगर में 12 मीटर चौड़ा सरकारी नाले पर प्लांटर का अवैध कब्जा , लेखपाल की भूमिका सवालों के घेरे में

चंदौली।मुगलसराय तहसील अंतर्गत अलीनगर क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों में दर्ज लगभग 12 मीटर चौड़ा सरकारी नाला अतिक्रमण के चलते पूरी तरह विलुप्त हो चुका है। वर्षों पूर्व नाले को पाट दिया गया और अब उसी भूमि पर अवैध निर्माण की तैयारी चल रही है। गंभीर तथ्य यह है कि यह सब कुछ राजस्व विभाग की जानकारी में होने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

राजस्व नियमों के अनुसार सरकारी नाला, राजबहा, चकरोड और नहर जैसी संपत्तियों की संरक्षा, सीमांकन और अतिक्रमण रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित लेखपाल एवं राजस्व अधिकारियों की होती है। इसके बावजूद नाले का अस्तित्व समाप्त हो जाना विभागीय कर्तव्यों के उल्लंघन की ओर स्पष्ट संकेत करता है। यदि समय रहते सीमांकन रिपोर्टिंग और बेदखली की कार्रवाई की जाती, तो सरकारी संपत्ति को इस प्रकार नष्ट होने से बचाया जा सकता था।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अलीनगर ही नहीं पूरे मुगलसराय क्षेत्र में कुछ प्लॉटर और कॉलोनाइजर राजस्व अमले की कथित मिलीभगत से नाले, माइनर, राजबहा, चकरोड और नहरों को पाटकर बिना स्वीकृत नक्शा और मानक के अवैध प्लॉटिंग कर रहे हैं। नियमों के विपरीत इन जमीनों को निजी बताकर बेचा जा रहा है जिससे आम नागरिक ठगी का शिकार हो रहे हैं।

अवैध अतिक्रमण के कारण क्षेत्र में जलनिकासी बाधित हो रही है जिससे किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। शिकायतों और मीडिया में बार-बार मामले सामने आने के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह राजस्व तंत्र की जवाबदेही और प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।