कन्नौज: एफएफडीसी में कन्नौज के इत्र एवं अगरबत्ती उद्योग की संभावनाओं पर संगोष्ठी आयोजन

कन्नौज। आज सुगन्ध एवं सुरस विकास केन्द्र (एफएफडीसी), कन्नौज के सभागार में अतर्स एवं परफ्यूमर्स एसोसिएशन, कन्नौज तथा कार्यालय उपायुक्त (उद्योग) जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केन्द्र कन्नौज के सहयोग से कन्नौज के इत्र एवं अगरबत्ती उद्योग की संभावनाओं पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में मुख्य अतिथि समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण का केन्द्र के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ल द्वारा पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ल ने अपने स्वागत भाषण के माध्यम से कार्यक्रम में उपस्थिति सभी उद्यमियों को कन्नौज के इत्र एवं अगरबत्ती उद्योग की संभावनाओं पर संगोष्ठी के आयोजन के उ?द्देशय के बारे में जानकारी प्रदान की तथा एफएफडीसी द्वारा कन्नौज इत्र उद्योग हेतु किये गये कार्यों तथा केन्द्र की उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी और केन्द्र की भविष्य की कार्ययोजना के बारे में उद्यमियों को अवगत कराया।

अतर्स एवं परफ्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने कन्नौज के इत्र एवं अगरबत्ती उद्योग के परिदृश्य पर प्रकाश डाला तथा एफएफडीसी द्वारा नये तरह की सुगन्ध एवं सुरस का निर्माण किये जाने को कहा तथा मंत्री से इस कार्य हेतु एफएफडीसी को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

गलोबल फोरम फॉर कन्नौज इत्र उद्योग के संयोजक विवेक नारायन मिश्र ने कन्नौज के इत्र उद्योग हेतु इस संगोष्ठी की महत्ता के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किये तथा एफएफडीसी के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने 10 कार्यबिन्दुओं द्वारा एफएफडीसी के माध्यम से शासन स्तर पर कन्नौज इत्र उद्योग की तरफ से मांगों को रखा।

सीएसआईआर-सीमैप से आये वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ० रमेश कुमार श्रीवास्तव ने कन्नौज के इत्र एवं अगरबत्ती उद्योग हेतु सीमैप में उपलब्ध तकनीकों तथा उपलब्ध सुविधाओं से अवगत कराते हुए बॉयो सैन्टालोल बनाने तथा पिपरमिन्ट, स्पीयरमिन्ट, तुलसी की नई प्रजातियों तथा उन्नत फील्ड आसवन इकाईयों की जानकरी प्रदान की।

डॉ० आलोक लहरी सलाहकार, सीएसआईआर-एनबीआरआई द्वारा इत्र उद्योग में किये जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उपलब्ध तकनीकों की जानकारी प्रदान की, जिनका लाभ कन्नौज के इत्र व अगरबत्ती उद्यमी लेकर अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एनबीआरआई कन्नौज के इत्र उद्यमियों की माइक्रोबिअल टेस्टिंग, मिलावट की जाँच तथा अन्य परीक्षणों में सहयोग प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है।

धनजय सिंह, उपायुक्त (उद्योग), जिला उद्यमिता विकास एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र, कन्नौज ने इत्र उद्यमियों तथा युवा उद्यमियों को उ०प्र० सरकार हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि इस योजनओं का लाभ लेकर युवा उद्यमी अपने व्यापार का विकास कर सकते हैं तथा समाज में रोजगार के नये अवसर पैदा कर सकते हैं।

सुनील कुमार गुप्ता, इत्र उद्यमी व पूर्व पालिकाध्यक्ष, कन्नौज ने बताया कि एफएफडीसी ने कन्नौज इत्र उद्योग को भौगोलिक सांकेतक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे कन्नौज के इत्र उद्योग का एक नई पहचान मिली है। इसके अलावा एफएफडीसी ने एरोमाथेरेपी के क्षेत्र में भी काफी काम किया है तथा कन्नौज के इत्र उद्यमियों को नई तकनीकी तथा आधुनिक गुणवत्ता परीक्षण संसाधनों से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि एफएफडीसी कन्नौज किसी विशेष व्यक्ति तक सीमित न होकर समान रूप से कन्नौज के इत्र उद्योग हेतु तकनीकी सहयोग प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। इससे कन्नौज को काफी लाभ हुआ है। हमें एफएफडीसी तक स्वयं आना होगा।

प्रवीण टण्डन, इत्र उद्यमी द्वारा कन्नौज के इत्र उद्यमियों को अपने उत्पाद की ब्राण्डिंग पर कार्य करने की सलाह दी गयी, जिससे उनके उत्पाद की एक अलग पहचान स्थापित हो सके तथा उनके ग्राहकों को एक विशिष्ट उत्पाद प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि हमें कन्नौज के उद्यमियों को ब्राण्डिंग के महत्व को समझाने तथा उन्हें ब्राण्डिंग हेतु प्रेरित करने के लिए एक स्टोरी प्रकाशित करनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने विपणन हेतु उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर ई-मार्केटिंग के माध्यम से अपने उत्पादों को बेचने हेतु इत्र उद्यमियों को जानकारी प्रदान की।

इसके पश्चात् प्रखर कपूर, इत्र उद्यमी, एम.एल. रामनारायण कन्नौज द्वारा अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर इत्र एवं अगरबत्ती उद्योग में व्याप्त संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया तथा कन्नीज के इत्र उद्यमियों को अर्न्तराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार कर उन्हें अन्र्त्तराष्ट्रीय बाजार में विक्रय कर लाभार्जन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गुलाब, मेंहदी तथा बेला की माँग लगातार बढ़ रही है, अतः इन सुगन्धित फसलों को भी एरोमा गिशन में जोड़ा जाना चाहिए।

मनीष कुमार राय, सहायक आयुक्त, वस्तु एवं सेवाकर विभाग, कन्नौज द्वारा जी०एस०टी० में इत्र एवं अगरबत्ती के परिप्रेक्ष्य में हुए नवीनतम बदलावों तथा संशोधनों पर प्रस्तुति दी गयी तथा नये जी०एस०टी० नियमों से कन्नौज के उद्यमियों को अवगत कराया गया।

इसी मौके पर उ०प्र० राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीसीडा), कानपुर के क्षेत्रीय प्रबन्धक आशीष नाथ ने कन्नौज में नवनिर्मित इत्र पार्क की अद्यतन प्रगति से कन्नौज के उद्यमियों को अवगत कराते हुए बताया कि इत्र पार्क का कार्य प्रगति पर है तथा जल एवं विद्युत आपूर्ति कार्य हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि बहुतायत मात्रा में प्लाण्ट्स का आवंटन अन्य उद्योग हो चुका है, जबकि हमें वास्तविक उद्यमियों की आवश्यकता है न कि निवेशक की।

राज्य मंत्री समाज कल्याण असीम अरूण ने एफएफडीसी द्वारा आयोजित संगोष्ठी की प्रशंसा करते हुए एफएफडीसी कन्नौज द्वारा इत्र उद्योग में किये जा रहे कार्यों और केन्द्र द्वारा रचे जा रहे नित नये आयामों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुगन्ध एवं सुरस विकास केन्द्र (एफएफडीसी) इत्र उद्यमियों तथा अधिकारियों के चर्चा का एक उचित स्थान है तथा हमें मिलकर कन्नौज के इत्र उद्योग के विकास हेतु बैठक के माध्यम से नियंगित रूप से इस प्रकार की चर्चा करती रहनी चाहिए। इस प्रकार के कार्यक्रमों से पुराने उद्यमियों के साथ साथ युवा उद्यमियों को भी इस उद्योग से जुड़ने तथा नवाचार के माध्यम से इस उद्योग को उचाई पर ले जाने में सहायता मिलेगी। अपने सम्बोधन के दौरान उन्होंने कहा कि वे वित्त मंत्रालय से कन्नौज इत्र उद्योग हेतु विशेष प्रस्ताव के माध्यम से बैठक करेंगे, तथा इत्र उद्योग को लक्जरी कैटेगरी से हटवाने हेतु प्रयत्न करेंगे। इसके अलावा उन्होंने कन्नौज में स्थापित संग्रहालय में कन्नौज के इत्र से सम्बन्धित अन्य पहलुओं को भी जनता के जानकारी हेतु विकसित करते हुए पारम्परिक डेग व भपका को कन्नौज के मुख्य प्रवेश द्वार पर दुकान के साथ स्थापित किया जायेगा। उन्होंने एफएफडीसी को निर्देशित करते हुए कहा कि उन्हें किसानों को सुगन्धित फसलों के कृषिकरण हेतु उचित सलाह देने के लिए तथा यदि जैविक उत्पादों की माँग है तो हमें उस क्षेत्र में कार्य करना पड़ेगा। कन्नौज के इत्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जिसकी जानकारी किसानों तथा उद्यमियों को उपलब्ध करानी चाहिए। राज्य एमएसएमई मंत्रालय अन्र्तराष्ट्रीय इत्र पर एक कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। एफएफडीसी को अन्य संस्थानों का भ्रमण करना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर सरकार के माध्यम से अथवा वैयक्तिक रूप से फ्रांस का भ्रमण कर सकते हैं। उन्होंने खाद्य पदार्थों में पलेवर के उपयोग हेतु भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के अनुसार जरूरी मानकों को पूर्ण कर इस दिशा में भी कार्य करना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि वे नई सुगन्धित फरालों हेतु बीमा को नीतिगत मुद्दे के तहत कन्नौज के किसानों हेतु बनाना पड़ेगा तथा वन विभाग को खस के कृषिकरण हेतु पत्र प्रेषित किया जायेगा।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ० नदीम अकबर उप निदेशक द्वारा संगोष्ठी में उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं तथा उद्यमियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रभास चन्द्र सिंह, सहायक निदेशक, आमोद प्रताप सिंह, सहायक निदेशक, गेडाम विलास डी. सहायक निदेशक, ज्ञानेन्द्र सिंह, वैज्ञानिक अधिकारी, मुनेन्द्र त्रिपाठी, कार्यालय अधीक्षक, कमलेश कुमार, वैज्ञानिक अधिकारी, प्रवीण राजपूत एवं कौशलेन्द्र का विशेष योगदान रहा।