एटा: क्षत्रिय समाज का बिगुल, कुलदीप सेंगर केस में निष्पक्ष सुनवाई और मीडिया ट्रायल पर रोक की माँग।

*एटा: क्षत्रिय समाज का बिगुल, कुलदीप सेंगर केस में निष्पक्ष सुनवाई और मीडिया ट्रायल पर रोक की मांग।*

*संवाददाता: रमेश जादौन सिटी अपडेट न्यूज़।*

एटा। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (एटा इकाई) ने उन्नाव बलात्कार मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के प्रति हो रही कथित एकतरफा न्याय प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई है। महासभा ने नायब तहसीलदार जलेसर को महामहीम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई है कि मामले की सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष हो और महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किए बिना कुलदीप सिंह सेंगर का पक्ष भी सुना जाए। ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि "टुकड़े-टुकड़े गैंग" द्वारा देश में खड़ा किया गया हंगामा इतना जबरदस्त रहा कि इसके दबाव में सरकारी एजेंसियां और माननीय न्यायालय भी बिना पूर्ण जांच के कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराने की ओर बढ़े। क्षत्रिय महासभा का आरोप है कि महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर अनदेखा किया गया और प्रकरण में एकतरफा कार्रवाई हुई। मुख्य मांगें हैं कि जब तक माननीय न्यायालय द्वारा आरोप पूरी तरह सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक मीडिया ट्रायल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
मामले की जांच और सुनवाई में किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव से मुक्त रहते हुए निष्पक्षता बरती जाए।
कुलदीप सिंह सेंगर के पक्ष में मौजूद तथ्यों को उचित महत्व दिया जाए।

यह ज्ञापन ऐसे समय में सौंपा गया है जब उन्नाव मामले में हाल ही में कानूनी प्रक्रिया में उलटफेर देखने को मिला है। दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर जमानत प्रदान की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत उस आदेश पर रोक लगा दी। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख पदाधिकारी एवं ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख लोग इस प्रकार रहे:

जिलाध्यक्ष एटा: ओम प्रताप सिंह (बॉबी),
प्रवेंद्र सिंह (पम्मी ठाकुर),
श्यामवीर सिंह,
विक्की ठाकुर,
सतेन्द्र जादौन,
अभय ठाकुर,
नरेश प्रताप सिंह,
सज्जन सिंह एवं अन्य गणमान्य क्षत्रिय समाज के लोग मौजूद रहे।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने इस मुद्दे को समाज की गरिमा और न्याय व्यवस्था में विश्वास से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना उचित सुनवाई के दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। महासभा का यह कदम समाज में न्याय की मांग को और मजबूत करने वाला बताया जा रहा है।यह घटना दर्शाती है कि उन्नाव मामला अब भी समाज के विभिन्न वर्गों में गहरी बहस का विषय बना हुआ है, जहां एक ओर पीड़िता के पक्ष की मजबूत आवाज है, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठन निष्पक्ष जांच और मीडिया के अतिरिक्त कवरेज पर सवाल उठा रहे हैं।


रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।