एटा/अवागढ़: मनरेगा में घोटाले का आरोप, मनरेगा कार्य में फ़र्जी 71 मजदूर दिखाकर हो रहा पैसों का बन्दरबाँट।

*एटा/अवागढ़: मनरेगा में घोटाले का आरोप, मनरेगा कार्य में फ़र्जी 71 मजदूर दिखाकर हो रहा पैसों का बंदरबाँट।*

अवागढ/एटा:

जनपद एटा के विकास खंड अवागढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत बरई कल्याणपुर में मनरेगा कार्य में भ्रस्टाचार का मामला सामने आया है जहाँ गाँव नगला गरीबा में एक चकमार्ग करीब 300 मीटर लंबा है। जिस पर 12 दिसंबर से कागजों में मनरेगा के अंतर्गत कार्य दिखाया जा रहा है परंतु वहां पर एक तसला भी मिट्टी चकरोड पर नहीं पड़ी है। कुछ मजदूरों को इकट्ठा करके उस चकरोड पर एकत्रित कर एक फोटो लिया गया था। इस फोटो को बार-बार सिस्टम में अपलोड करके मनरेगा के अंतर्गत कार्य दिखाया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक जिन मजदूरों का फोटो मनरेगा कार्य में दिखाया जा रहा है वास्तव में उनकी संख्या 9 है जो कि फ़ोटो में दिखाए गए मजदूर गांव नगला गरीबा के अंदर सीमेंट की ईंटों से रोड निर्माण का कार्य कर रहे हैं। जिनकी लेवरी₹400 प्रति मजदुर है जबकि मनरेगा में चक रोड मार्ग पर 71 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कराई गई है। जिसमें मनरेगा के अंतर्गत प्रति मजदूर की मजदूरी 237 रुपए है जिसका फर्जी बंदर बांट करके अधिकारियों की मिली भगत से प्रधान और संबंधित अधिकारी सरकारी खजाने पर डाका डाल रहे हैं।
उक्त पंचायत की भ्रष्टाचार की खबर जिला अधिकारी के पास में भी है और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की गई है। भ्रष्टाचार का उजागर करने के लिए विकास कुमार शर्मा ने हाई कोर्ट में भी एक याचिका दायर कर रखी है। जिसका जवाब हाई कोर्ट से जनवरी तक आने की संभावना है। जिसके लिए जिला अधिकारी एटा के द्वारा जिला कृषि अधिकारी को संबंधित प्रधान के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं परंतु अभी तक कोई जांच नहीं हुई है।
विकास कुमार शर्मा ने आरोप लगाते हुए बताया है कि उक्त ग्राम पंचायत बरई कल्याण पुर में सामुदायिक शौचालय के कायाकल्प के नाम से ₹600000 निकाले गए थे परंतु किसी भी शौचालय का कोई कायाकल्प नहीं हुआ। आज तक वह शौचालय इस स्थिति में पड़े हुए हैं । इस गांव के निवासी हिमालय कुमार ने बताया की नलों के रिबोर के नाम पर भी कई लाख रुपए का गवन प्रधान, सेक्रेटरी और खण्ड विकास अधिकारी की मिली भगत द्वारा किया गया है। आंकड़ों के अनुसार 42 लाख रुपए का पेमेंट पंचायत को सत्र2023 24 में किए गए कार्यों के लिए स्वीकृत किया गया था परंतु शासनादेश के खिलाफ जाकर के संबंधित अधिकारी एवं प्रधान ने उसे पैसे से 2024 25 तक के अग्रिम पेमेंट कार्यों में दर्शाए गए हैं ।
गवर्नमेंट की योजना के अनुसार मनरेगा के अंतर्गत गांव के लोगों को ही अपनी पंचायत में काम दिया जाता है जब गांव में मजदूर उपलब्ध न हो तब आप बाहर से ला सकते हैं परंतु पंचायत के प्रधान ने उसको भी नजरअंदाज किया है मनरेगा में फर्जी तरह से जिन मजदूरों की उपस्थिति दिखाई गई है वह गांव से काफी दूर के हैं। गांव के निवासी विकास कुमार ने बताया कि मामला जिला अधिकारी के संज्ञान में होते हुए भी जांच में अभी तक शिथिलता वरती जा रही है मामला चारों तरफ से ऊपर से लेकर नीचे तक मिली भगत का नजर आ रहा है। जब तक पारदर्शी तरीके से जांच नहीं हो रही है तब तक सही तथ्यों का पता लगाना संभव नहीं है संबंधित उच्च अधिकारियों को इस तरह के भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।