पांचवी की पुस्तक से कालीबाई के बलिदान का पाठ हटाने पर पूर्व सांसद की प्रतिक्रिया, जनजाति बाला कालीबाई की शहादत के इतिहास को पाठ्यक्रम से हटाना गलत : भगोरा

संवाददाता - संतोष व्यास

डूंगरपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव एवं पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने बयान जारी कर कक्षा पांचवी की पुस्तक से वीरबाला कालीबाई की शहादत का पाठ हटाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार को आजादी के दीवानों से कोई सरोकार नहीं है। जनजाति समाज की वीरबाला कालीबाई ने शिक्षा के लिए शहादत दी लेकिन सरकार ने पाठ्यक्रम से पाठ हटाकर शहादत का अपमान किया है। इस करतुत से भाजपा सरकार का आदिवासी विरोधी चेहरा भी बेनकाब हो गया है।

भगोरा ने कहा कि जिले की वीर भूमि रास्तापाल में वीरबाला कालीबाई ने अपने गुरू को अंग्रेजों के जुल्म से बचाने अपने प्राणों की आहुति दे दी। जनजाति बाला कालीबाई की शहादत जनजाति समाज के लिए गौरव का विषय है, लेकिन राज्य की नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने कक्षा पांच की पुस्तक से कालीबाई की शहादत से जुड़ा पाठ हटाकर इतिहास को जन-जन तक पहुंचने से रोकने का काम किया है। भाजपा सरकार की रीति-नीति सदैव आदिवासी विरोधी रही है।

भगोरा ने कहा कि वीरबाला कालीबाई ने अल्पायु में शिक्षा की अलख जगाने के लिए प्राणों का बलिदान दिया। अंग्रेजों के अत्याचार और जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की। ब्रिटिश हुकुमतकाल में अंग्रेज शिक्षा के प्रसार को रोकना चाहते थे। रास्तापाल गांव के एक स्कूल में नानाभाई और सेंगाभाई पढ़ाते थे। ब्रिटिश हुकुमतकाल में स्कूल बंद करने का आदेश दिया तो नानाभाई खांट ने इसका विरोध किया। पुलिस ने नानाभाई खांट को मारा और सेंगाभाई को ट्रक से बांधकर घसीटा। वीरबाला कालीबाई ने शिक्षक को बचाने हांसिए से रस्सी काट दी। इसके बाद अंग्रेजों ने कालीबाई पर गोलियों चला दी और वीरबाला शहीद हो गई। आज भी कालीबाई को राजस्थान में शिक्षा और साहस की प्रतीक के रूप में याद किया जाता है और राज्य की भाजपा सरकार शहादत के इतिहास को समेटने वाले पाठ को पाठ्यक्रम से हटा रही है।