सण्डीला में कथित रिकवरी के नाम पर दबंगई! डाला चालक से मारपीट, वाहन कब्जाने और 20 हजार रुपये गायब करने का आरोप

सण्डीला में कथित रिकवरी के नाम पर दबंगई! डाला चालक से मारपीट, वाहन कब्जाने और 20 हजार रुपये गायब करने का आरोप

भूपेंद्र सिंह आशु, उदय राज, गगन अरोरा समेत अन्य लोगों के नाम आए सामने; पुलिस को हर महीने 20 हजार रुपये पहुंचाने का दावा किए जाने का भी आरोप, एसपी अशोक कुमार मीणा से निष्पक्ष जांच की मांग

#हरदोई

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सण्डीला थाना क्षेत्र में वाहन रिकवरी के नाम पर कथित दबंगई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। काली स्कॉर्पियो सवार लोगों पर डाला चालक को रोककर मारपीट करने, धमकाने और जबरन वाहन ले जाने का आरोप लगा है। पीड़ित उत्तम ने वाहन में रखे 20 हजार रुपये भी गायब होने का दावा करते हुए पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।

मामले में भूपेंद्र सिंह आशु,उदय राज, गगन अरोरा शुभम मिश्रा,समेत अन्य लोगों के नाम आरोपों के दायरे में बताए जा रहे हैं। पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोपों में कथित रिकवरी एजेंट द्वारा हर महीने पुलिस को 20 हजार रुपये पहुंचाने का दावा किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि इस कथित दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

गौसगंज तिराहे पर रास्ता रोककर मारपीट का आरोप

थाना कछौना क्षेत्र के ग्राम बहादीन निवासी उत्तम पुत्र रंजीत के अनुसार उसने यूपी-35 टी 7429 नंबर का डाला वाहन रजनीश पुत्र रामपाल से खरीदा था। 30 अप्रैल 2026 को वाहन की लिखापढ़ी हुई थी। पीड़ित का दावा है कि वह नियमित रूप से किस्तें जमा कर रहा था और उसके पास भुगतान की रसीदें भी मौजूद हैं।

आरोप है कि 2 नवंबर 2026 को उत्तम अपने चालक हरिओम के साथ सण्डीला-गौसगंज तिराहे की पुलिया की चढ़ाई पर जा रहा था। तभी काली स्कॉर्पियो सवार लोगों ने रास्ता रोक लिया। पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ और चालक के साथ मारपीट की गई तथा असलहा दिखाकर धमकाया गया।

वाहन कब्जे में, 20 हजार रुपये भी गायब होने का दावा

पीड़ित के मुताबिक उसका डाला वाहन ठाकुर एसोसिएट एजेंसी जैसी जगह पर खड़ा करा दिया गया। वाहन में रखे 20 हजार रुपये भी वापस नहीं मिले। अब पीड़ित वाहन की वापसी और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

पुलिस के नाम पर कथित वसूली का दावा, जांच की उठी मांग

इस प्रकरण में सबसे गंभीर सवाल उस कथित दावे को लेकर है, जिसमें पुलिस को हर महीने 20 हजार रुपये पहुंचाने की बात कही गई है। यदि ऐसा दावा किया गया है तो इसकी सत्यता की जांच कौन करेगा? क्या संबंधित लोगों से पूछताछ होगी? क्या पुलिस प्रशासन इस कथित लेनदेन की निष्पक्ष पड़ताल कराएगा?

एसपी से सीधी मांग, आरोपों की हो निष्पक्ष जांच

पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वाहन खरीद के दस्तावेज, किस्तों की रसीदें और कथित घटना से जुड़े साक्ष्यों की जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।

अब सवाल सिर्फ एक डाला वाहन का नहीं, बल्कि कानून की प्रक्रिया और जवाबदेही का है। यदि रिकवरी के नाम पर किसी को मारपीट और धमकी का सामना करना पड़ा है तो यह गंभीर जांच का विषय है। सण्डीला पुलिस और जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

नोट: समाचार में उल्लिखित सभी नाम पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोपों के संदर्भ में हैं। किसी की संलिप्तता अभी प्रमाणित नहीं है।

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