फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंटों पर गरीब मजदूर से वसूली और उत्पीड़न का आरोप!

फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंटों पर गरीब मजदूर से वसूली और उत्पीड़न का आरोप!

पहले बाइक कब्जे में ली, फिर 5 हजार रुपये लेकर छोड़ी! 18 हजार रुपये जमा कराने के बाद भी नहीं मिला हिसाब, अब 10 हजार की और मांग का आरोप

#Hardoi 

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गरीब मजदूर की मेहनत की कमाई पर आखिर किसका अधिकार है? कर्ज की किस्तें टूटने का मतलब क्या यह है कि कोई भी रिकवरी एजेंट कानून को ताक पर रखकर गरीब की मोटरसाइकिल कब्जे में ले ले और मनमाने तरीके से पैसों की मांग करने लगे? हरदोई में एक फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंटों पर लगे आरोपों ने वसूली के तौर-तरीकों और गरीब उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला टड़ियावां थाना क्षेत्र गोपामऊ चौकी के मोहल्ला सागर तालाब निवासी रामकुमार पुत्र जदुनाथ का है। पीड़ित के मुताबिक वह मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। उसने पिहानी स्थित जोहल मीटर्स से मोटरसाइकिल फाइनेंस कराई थी। आर्थिक तंगी के चलते उसकी दो किस्तें जमा नहीं हो सकीं। आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर रिकवरी एजेंट उदयराज पुत्र लालबहादुर और उसके एक अन्य साथी ने कथित तौर पर मोटरसाइकिल जबरन अपने कब्जे में ले ली।

पीड़ित का आरोप है कि मोटरसाइकिल छुड़ाने के नाम पर उससे 5,000 रुपये नकद लिए गए। इसके बाद कुछ दिन बीतने पर गोपामऊ बस स्टैंड के पास दोबारा मोटरसाइकिल पकड़ ली गई। आरोप है कि इस दौरान पीड़ित से अभद्रता की गई और मोटरसाइकिल छोड़ने के बदले 18,000 रुपये की मांग की गई। पीड़ित ने अपनी शिकायत में 18 हजार रुपये देने और इसके बावजूद रकम का स्पष्ट हिसाब नहीं मिलने का आरोप लगाया है।

इतना ही नहीं, शिकायत में 10 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग का भी जिक्र!

रामकुमार का आरोप है कि संबंधित लोगों द्वारा अब दोबारा सेटलमेंट के नाम पर 10,000 रुपये मांगे जा रहे हैं। रकम मांगने के तरीके और कथित धमकियों से परेशान होकर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक हरदोई को जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

एसपी साहब! गरीब की फरियाद को फाइलों में दफन मत होने दीजिए!

पीड़ित ने अपनी शिकायत में कथित लेनदेन की वीडियो रिकॉर्डिंग, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य उपलब्ध होने की बात कही है। उसने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई, कथित वसूली गई रकम का हिसाब और भविष्य में किसी भी प्रकार की धमकी अथवा उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की है।

अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस शिकायत को महज एक जनसुनवाई संदर्भ संख्या मानकर औपचारिकता निभाता है या फिर गरीब मजदूर की फरियाद पर साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक जांच भी होती है।

क्योंकि कानून की किताब में कर्ज वसूली के नियम जरूर हैं, लेकिन किसी गरीब की मजबूरी को वसूली का हथियार बनाने की छूट किसी को नहीं हो सकती।

नोट: यह खबर पीड़ित की जनसुनवाई शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित फाइनेंस कंपनी तथा नामित व्यक्तियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

 डीडी शुक्ला स्वतंत्र पत्रकार, हरदोई

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