लेखक और कवि ज्ञानवर्धन के अहम स्रोत: प्रो मुकेश पाण्डेय

हिंदी सप्ताह के तहत आयोजित�विविध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित�

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मुकेश पाण्डेय ने कहा कि सभी लेखक और कवि विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के अहम स्रोत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहने का आह्वान किया। उन्होंने हिंदी विभाग में हिंदी सप्ताह के समापन मौके पर उक्त उद्गार व्यक्त किए।
प्रो पाण्डेय ने सर्व प्रथम रानी लक्ष्मीबाई को याद किया। उन्होंने मैथिली शरण गुप्त और डा वृंदावन लाल वर्मा को भी भावपूर्वक याद किया। साथ ही साथ ओरछाधीश रामराजा और दतिया की मां पीतांबरा को भी याद किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी साहित्यकारों का भी स्वागत किया।
कुलपति प्रो पाण्डेय ने उम्मीद जताई की कि हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रम से विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन हुआ होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय के विविध कार्यक्रमों का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने हिंदी सप्ताह के सफल आयोजन के लिए पूरी आयोजन समिति को बधाई दी।
लक्ष्मी कांत वर्मा ने डा वृंदावन लाल वर्मा से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डा वर्मा को गढ़ कुंडार से अत्यधिक लगाव था। झांसी की रानी के प्रचार में उनकी अहम भूमिका का भी उल्लेख किया।
कुलपति प्रो पाण्डेय ने हिंदी सप्ताह के तहत आयोजित विविध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया।
भाषण प्रतियोगिता में दिव्या निगम प्रथम,अमित अहिरवार द्वितीय तथा नमन चतुर्वेदी तृतीय रहे। निबंध लेखन में प्रथम अंकित तिवारी प्रथम रहे। गीता देवी द्वितीय रही। वंदना पाल तृतीय रहीं। काव्य पाठ प्रतियोगिता में सुंदरम चतुर्वेदी प्रथम,अभिषेक बबेले द्वितीय और पलक गुप्ता तृतीय रहीं। काव्य पाठ प्रतियोगिता में 40 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
शुरुआत में कुलपति प्रो पाण्डेय और अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर पुष्प अर्पित किया। संचालन डा सुधा दीक्षित ने किया।�
इससे पहले काव्य पाठ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष और डीन कला संकाय डा पुनीत बिसारिया ने कुलपति और अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस कार्यक्रम में डा मुन्ना तिवारी, डा अचला पाण्डेय, डा श्रीहरि त्रिपाठी, डा प्रेमलता, डा भगवान दास राही, डा विपिन प्रसाद, डा सुनीता वर्मा, श्रीमती रमा शुक्ल, डा राघवेन्द्र दीक्षित, अरुण कुमार हिंगवासिया, उमेश शुक्ल, अतीत विजय, रंजना बुंदेला, रवीन्द्र गुप्त आदि उपस्थित रहे। अंत में डा पुनीत बिसारिया ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।