मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में सजी ‘नेपथ्य के रंग’ प्रदर्शनी, वाराणसी की आध्यात्मिक विरासत को कला के जरिए किया प्रस्तुत

मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में सजी ?नेपथ्य के रंग? प्रदर्शनी, वाराणसी की आध्यात्मिक विरासत को कला के जरिए किया प्रस्तुत

भारतीय रेलवे यातायात सेवा की वरिष्ठ अधिकारी आशिमा मेहरोत्रा और प्रख्यात कलाकार बंशीधर प्रतिहारी की कलाकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र

मुंबई। मध्य रेलवे की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में ?नेपथ्य के रंग?पर्दे के पीछे के रंग? शीर्षक से कला प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। 20 से 26 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस प्रदर्शनी में प्रख्यात कलाकार बंशीधर प्रतिहारी और समकालीन दृश्य कलाकार आशिमा मेहरोत्रा की कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं। प्रदर्शनी में वाराणसी की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन के गहरे भावनात्मक पहलुओं को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी का उद्घाटन सिमरोजा आर्ट गैलरी की संस्थापक एवं निदेशक फिरोजा गोदरेज ने किया। इस अवसर पर कोंकण रेलवे के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संतोष कुमार झा, बॉम्बे आर्ट सोसाइटी के अध्यक्ष राजेंद्र पाटिल और वरिष्ठ कलाकार बीरेन दास विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

वाराणसी की संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम

?नेपथ्य के रंग? प्रदर्शनी में वाराणसी को केवल उसके ऐतिहासिक भवनों, घाटों और धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि शहर की आध्यात्मिक ऊर्जा, सामूहिक स्मृतियों और जीवन-दर्शन को भी कलाकृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।

कलाकारों ने रंगों, बनावटों, प्रतीकात्मक आकृतियों और अमूर्त शैली का उपयोग करते हुए जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म के शाश्वत चक्र को दर्शाने का प्रयास किया है। प्रदर्शनी दर्शकों को दृश्य संसार से आगे बढ़कर उन भावनाओं और आध्यात्मिक अनुभवों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है, जो वाराणसी की पहचान को विशिष्ट बनाते हैं।

बंशीधर प्रतिहारी की कलाकृतियों में भारतीय कला परंपरा की झलक

प्रख्यात कलाकार बंशीधर प्रतिहारी विश्वभारती विश्वविद्यालय के कला भवन के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र हैं। उनकी कला दृष्टि पर महान कलाकार एवं शिक्षक नंदलाल बोस की परंपरा का प्रभाव दिखाई देता है। भारतीय कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, राज्य पुरस्कार और वर्ष 2023 में ओडिशा के सर्वोच्च कला सम्मान धर्मपद पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।

आशिमा मेहरोत्रा की कला में प्रकृति, स्मृतियों और मानवीय भावनाओं का समावेश

आशिमा मेहरोत्रा समकालीन दृश्य कलाकार होने के साथ-साथ भारतीय रेल यातायात सेवा की वरिष्ठ अधिकारी भी हैं। उनकी कलाकृतियों में आध्यात्मिकता, प्रकृति, सांस्कृतिक स्मृतियों और मानवीय भावनाओं को प्रमुखता दी गई है।

उनकी कला में अमूर्त शैली, प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति और विभिन्न माध्यमों के प्रयोग देखने को मिलते हैं। विशेष रूप से मोम आधारित चित्रकला शैली में मोम, रेजिन और रंगों की परतों के जरिए स्मृतियों और जीवन के अनुभवों को अभिव्यक्त किया जाता है। उनकी कलाकृतियां 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी 2024-25, यूरेशिया बुसान अंतरराष्ट्रीय कला मेला 2025 और बीजिंग में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी में भी प्रदर्शित हो चुकी हैं।

26 अक्टूबर तक आम जनता के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी

दोनों कलाकारों की कलाकृतियां भारतीय कला की पारंपरिक विरासत और आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच संवाद स्थापित करती हैं। प्रदर्शनी में दर्शकों को रंगों, रूपों और प्रतीकों के माध्यम से वाराणसी के उन पहलुओं को समझने का अवसर मिल रहा है, जो सामान्य दृष्टि से परे हैं।

यह प्रदर्शनी 20 से 26 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक मुंबई के महात्मा गांधी रोड स्थित जहांगीर आर्ट गैलरी के गैलरी नंबर 2 में आम जनता के लिए खुली रहेगी। कला प्रेमी और शहरवासी इस दौरान प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं।

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह आयोजन कला, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर रहा है।