पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने पुराने अमिनगांव हेरिटेज स्टेशन पर खोला पारंपरिक खेल केंद्र

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने पुराने अमिनगांव हेरिटेज स्टेशन पर खोला पारंपरिक खेल केंद्र

1908 में स्थापित ऐतिहासिक स्टेशन को मिला नया स्वरूप, पूर्वोत्तर के पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने की पहल

गुवाहाटी। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने रेल विरासत के संरक्षण और पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने 27 अक्टूबर 2026 को पुराने अमिनगांव रेलवे स्टेशन के विरासत स्थल पर पारंपरिक खेल केंद्र का उद्घाटन किया। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे खेल संघ के सहयोग से विकसित यह केंद्र ऐतिहासिक रेलवे प्लेटफॉर्म को पारंपरिक खेलों के लिए समर्पित स्थान में बदलने की अनूठी पहल है।

इस केंद्र का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध खेल परंपराओं को संरक्षित करना और नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना है। यह पहल विकास के साथ विरासत को सहेजने की सोच को भी आगे बढ़ाती है।

पूर्वोत्तर के पारंपरिक खेलों को मिलेगा बढ़ावा

इस केंद्र में असम और पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित धोपखेल, तांग-गुटी, पेंग खेल, कोरी-खेल और रोशी-ताना सहित मणिपुर के मुकना व युबी लाकपी तथा मिजोरम के इनसुकनावम जैसे पारंपरिक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा।

ये खेल स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, शारीरिक दक्षता और आपसी जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली और व्यावसायिक खेलों के बढ़ते प्रभाव के कारण इन पारंपरिक खेलों के प्रति लोगों की भागीदारी कम होती जा रही है।

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे खेल संघ की योजना इस केंद्र में नियमित खेल गतिविधियां आयोजित करने और पारंपरिक खेलों के संरक्षण में जुटे संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करने की है। यहां भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन की संभावनाएं भी विकसित की जाएंगी।

महाप्रबंधक ने पहल की सराहना की

उद्घटन के अवसर पर महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने बच्चों और खिलाड़ियों की गतिविधियों के माध्यम से ऐतिहासिक स्टेशन को जीवंत बनाए रखने की पहल की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि यह केंद्र आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित रखने के साथ पारंपरिक खेलों को नया जीवन देगा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा।

स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा है स्टेशन का इतिहास

वर्ष 1908 में स्थापित पुराना अमिनगांव रेलवे स्टेशन स्वतंत्रता से पहले गुवाहाटी और पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख प्रवेश द्वारों में से एक था। लगभग आधा किलोमीटर लंबे और 25 मीटर चौड़े प्लेटफॉर्म वाला यह स्टेशन उस समय असम-बंगाल रेलवे के महत्वपूर्ण आर्थिक और माल परिवहन केंद्र के रूप में कार्य करता था।

ऐतिहासिक असम मेल के माध्यम से चाय बागान मालिक, व्यापारी, मिशनरी, स्वतंत्रता सेनानी और अन्य यात्री यहां पहुंचते थे। इसके बाद वे ब्रह्मपुत्र नदी को नौका या फेरी से पार कर आगे की यात्रा करते थे।

इस स्टेशन का संबंध महात्मा गांधी की असम यात्राओं से भी रहा है। गांधीजी वर्ष 1921, 1926, 1934 और 1946 में असम यात्रा के दौरान यहां से गुजरे थे। वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के समय उनके साथ स्वतंत्रता सेनानी तरुण राम फूकन भी थे, जिन्होंने गांधीजी के भाषणों का अनुवाद किया था।

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों ने भी इस रेलवे मार्ग का उपयोग किया था। अमिनगांव और पांडु के बीच रेल फेरी सेवा के माध्यम से ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों को जोड़ा जाता था। इस व्यवस्था में विशेष नौकाओं पर पूरी रेलगाड़ियों और माल को नदी के पार ले जाया जाता था।

सरायघाट पुल बनने के बाद बंद हुआ रेल फेरी का दौर

7 जून 1963 को इस स्टेशन पर आखिरी ट्रेन पहुंची थी। इसके अगले दिन, 8 जून 1963 को सरायघाट पुल पर रेल यातायात शुरू होने के साथ ही फेरी आधारित रेल परिवहन के इस ऐतिहासिक दौर का अंत हो गया।

अब इसी विरासत स्थल पर पारंपरिक खेल केंद्र की स्थापना के माध्यम से पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने इतिहास और स्थानीय संस्कृति को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है। यह पहल ऐतिहासिक रेलवे संपत्तियों के उपयोग के साथ क्षेत्र की पारंपरिक खेल विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने यह जानकारी दी।