अम्बेडकरनगर में खाकी का नंगा नाच: पत्रकार के भांजे से पांच हजार की वसूली, फर्जी कट्टे में जेल भेजने का सनसनीखेज खेल उजागर

खाकी का खौफ और उगाही का खेल: अम्बेडकरनगर में फर्जी कट्टे और वसूली का गंदा खेल उजागर, पत्रकार के भांजे से मांगे 10 हजार!

 

लखनऊ/अम्बेडकरनगर:

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को आईना दिखाने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहाँ एक तरफ प्रदेश सरकार अपराध और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करती है, वहीं खाकी वर्दी पहने कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मी ही कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। अम्बेडकरनगर जिले के इब्राहिमपुर थाने के पुलिसकर्मियों पर फर्जी मामलों में फंसाने, अवैध वसूली (रिश्वतखोरी) और बेकसूर युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में पीड़ित पक्ष ने पुलिस महानिदेशक (DGP), उत्तर प्रदेश को एक सनसनीखेज प्रार्थना पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच और तत्काल निलंबन की मांग की है।

 

क्या है पूरा मामला?

नवभारत दर्पण न्यूज नेटवर्क के प्रेस रिपोर्टर शोएबुद्दीन बेग (निवासी: अलनपुर, थाना इब्राहिमपुर, अम्बेडकरनगर) ने डीजीपी को दिए गए शिकायती पत्र में खाकी के काले कारनामों की पोल खोली है। रिपोर्टर के अनुसार, इब्राहिमपुर थाने पर तैनात एसआई सुमित कुमार, बृजेश सिंह, दीपक सिंह (दीवान) और सिपाही विनय कुमार यादव का एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है, जो गाँव-गाँव घूमकर पढ़ने वाले मासूम बच्चों को अपना निशाना बनाता है। उन्हें फर्जी तरीके से पकड़कर थाने लाया जाता है और कट्टा या अन्य अपराधों में जेल भेजने का खौफ दिखाकर डराया-धमकाया जाता है।

एअर गन वाले को बनाया निशाना, 5 हजार नकद वसूलकर छोड़ा

पीड़ित पत्रकार ने आरोप लगाया है कि 27 अक्टूबर 2026 को सिपाही विनय कुमार यादव उनके भांजे सुबहान (पुत्र स्व. मुनाफ बेग) को उसके घर के सामने से एक 'एअर गन' के साथ जबरन अपनी बाइक पर बैठाकर थाने ले जाने लगा। रास्ते में श्मशान के पास सुनसान जगह पर ले जाकर उसे जेल भेजने की धमकी दी गई और अपनी जान बचाने के एवज में 10,000 रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की गई। किसी तरह पीड़ित परिवार ने इधर-उधर से 5,000 रुपये जुटाकर दिए, तब जाकर लड़के की जान बच पाई।

पहले भी कर चुके हैं ऐसा ही खेल, भतीजे को थमाया था टूटा कट्टा

पत्रकार ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि लगभग 12 दिन पहले भी एसआई सुमित कुमार और बृजेश सिंह ने फोर्स के साथ उनके भतीजे शाकिब को इल्तिफातगंज बाजार की एक नाई की दुकान से उठा लिया था। इसके बाद जियापुर पुलिया के पास खड़ा करके उसे एक टूटा हुआ कट्टा और 12 बोर का कारतूस थमाकर जबरन फोटो खींची गई और फर्जी एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया गया।

हालाँकि, गनीमत यह रही कि फर्जीवाड़े की भनक लगते ही परिजनों ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CGM) अम्बेडकरनगर और डीजीपी यूपी को टेलीग्राम के जरिए सूचित कर दिया था, जिसके चलते न्यायालय से तुरंत जमानत मिल गई।

 

पत्रकार को भी नहीं बख्शा: 24 घंटे हवालात में रखकर किया 151 का चालान

 

आरोप है कि इन भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के काले कारनामों का विरोध करने या सच सामने लाने पर पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता पत्रकार शोएबुद्दीन बेग का आरोप है कि एक माह पहले समझौते के नाम पर उन्हें थाने बुलाया गया और 24 घंटे तक थाने में बंद रखने के बाद शांति भंग (धारा 151) में उनका चालान कर दिया गया।

 

इन अधिकारियों को भेजी गई है प्रतिलिपि

पीड़ित पत्रकार ने इस गंभीर मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी शिकायत की प्रतियां निम्नलिखित उच्च अधिकारियों को भेजी हैं:

 * पुलिस कमिश्नर, अयोध्या मण्डल, अयोध्या।

 * अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश।

 * प्रमुख सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश शासन।

 * पुलिस अधीक्षक, जनपद अम्बेडकरनगर।

अब देखना यह होगा कि क्या खाकी की आड़ में गरीबों और नौजवानों का जीवन बर्बाद करने वाले इन पुलिसकर्मियों पर शासन-प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?