Chandauli News:परिवार ने छोड़ा, तो पराए बने सहारा,नौ महीने पहले थामा था प्रेम का हाथ, बीमारी ने छीन ली जिंदगी परिवार ने छोड़ा तो पति के दोस्तों और आसपास के लोगों ने निभाया फर्ज,

अंतिम संस्कार में विधायक-चेयरमैन समेत समाजसेवियों ने बढ़ाया मदद का हाथ

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय

चंदौली। नौ महीने पहले अपनी पसंद से शादी कर नई जिंदगी शुरू करने वाली सपना कुमारी विश्वकर्मा की कहानी का अंत इतना दर्दनाक होगा, शायद किसी ने नहीं सोचा था। लेहरा खास निवासी 21 वर्षीय सपना ने दिरेहू निवासी 20 वर्षीय रितेश खरवार से प्रेम विवाह किया था। दोनों ने परिवार की रजामंदी के बिना अपनी मर्जी से शादी की और इसके बाद परिवार से अलग रहकर जिंदगी बिता रहे थे। शादी के बाद से ही सपना की तबीयत खराब रहने लगी थी। पिछले कुछ दिनों से बीमारी ने उसे और कमजोर कर दिया। आखिरकार शुक्रवार को करीब तीन बजे उसकी मौत हो गई।

सपना की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल उसके अंतिम संस्कार को लेकर खड़ा हुआ। जिस परिवार से उम्मीद की जा सकती थी, उससे शादी के बाद ही दूरी बन गई थी। ऐसे में रितेश के सामने पत्नी के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी तो थी, लेकिन साथ देने वाला कोई अपना नहीं था।मुश्किल की इस घड़ी में दिरेहू के दोस्तों और आसपास के लोगों ने रिश्तों की परिभाषा ही बदल दी।खून का रिश्ता न होते हुए भी वे रितेश के साथ खड़े हुए और मिलकर अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था में सहयोग किया।

*जब अपनों ने मुंह मोड़ा, मदद को आगे आए जनप्रतिनिधि*
चकिया।सपना की मौत की जानकारी क्षेत्र में हुई तो लोगों ने अपनी संवेदनशीलता दिखाई।क्षेत्रीय विधायक कैलाश खरवार, नगर चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव और नगर के समाजसेवी कैलाश जायसवाल ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने आर्थिक सहयोग देकर दुख की इस घड़ी में रितेश का साथ दिया। उदय प्रताप, विपिन यादव और चंदन पासवान समेत अन्य लोगों ने भी आर्थिक मदद की।

*सिर्फ अंतिम संस्कार नहीं, मुश्किल वक्त में निभाया साथ*
सपना और रितेश ने करीब नौ महीने पहले अपनी मर्जी से शादी कर परिवार से अलग रहने का फैसला किया था। शायद उन्हें उम्मीद रही होगी कि जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर आ जाएगी। लेकिन बीमारी ने सपना को जिंदगी से ही दूर कर दिया। मौत के बाद जब अपने पीछे हट गए तो दोस्तों और आसपास के लोगों ने आगे बढ़कर वह जिम्मेदारी निभाई, जो अक्सर अपनों के हिस्से आती है।सपना की मौत ने रितेश को अकेला कर दिया है। वहीं, इस दुखद घड़ी में दिरेहू के लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से मिला सहयोग यह संदेश भी दे गया कि रिश्ते केवल खून से नहीं बनते, कई बार इंसानियत भी किसी को अपना बना लेती है।