इटारसी–नागपुर तीसरी लाइन परियोजना में बड़ी उपलब्धि, जौलखेड़ा यार्ड का नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य पूरा

इटारसी?नागपुर तीसरी लाइन परियोजना में बड़ी उपलब्धि, जौलखेड़ा यार्ड का नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य पूरा

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से मजबूत हुई सिग्नलिंग व्यवस्था, यार्ड की क्षमता और ट्रेनों के संचालन में बढ़ेगा लचीलापन

मध्य रेल ने इटारसी?नागपुर तीसरी लाइन परियोजना के तहत जौलखेड़ा यार्ड में नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह महत्वपूर्ण कार्य 21 अगस्त 2026 को पूरा किया गया। इसके साथ ही इस रेलखंड में रेल अवसंरचना को और मजबूत करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने तथा ट्रेनों के सुरक्षित और सुचारु संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान जौलखेड़ा यार्ड की सिग्नलिंग और परिचालन व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए हैं। मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में उन्नत किया गया है। इसमें प्रस्तावित तीसरी रेल लाइन के लिए आवश्यक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इससे भविष्य में तीसरी लाइन के संचालन को अधिक प्रभावी तरीके से जोड़ा जा सकेगा।

11 नए टर्नआउट लगाए गए

यार्ड रीमॉडलिंग के तहत 11 नए टर्नआउट लगाए गए, जबकि 10 पुराने टर्नआउट को हटाया गया। इसके अलावा दो मुख्य लाइन टर्नआउट को 1 इन 8.5 से बढ़ाकर 1 इन 12 किया गया है। इनमें थिक वेब स्विच का प्रावधान किया गया है, जिससे ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।

दोषपूर्ण लेआउट में किया गया सुधार

जौलखेड़ा यार्ड में मौजूद सभी दोषपूर्ण लेआउट को भी दुरुस्त कर दिया गया है। इससे यार्ड में ट्रेनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी और परिचालन दक्षता के साथ संरक्षा में भी सुधार होगा।

ट्रेनों के ठहराव की क्षमता बढ़ी

यार्ड में विभिन्न लाइनों के क्लियर स्टैंडिंग रूम में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। अप मेन लाइन का सीएसआर 710 मीटर से बढ़ाकर 786 मीटर, अप लूप लाइन का 710 मीटर से 786 मीटर, डाउन मेन लाइन का 710 मीटर से बढ़ाकर 874 मीटर और डाउन लूप लाइन का 710 मीटर से 800 मीटर किया गया है। वहीं, ए एंड डी साइडिंग का सीएसआर 60 मीटर से बढ़ाकर 65 मीटर किया गया है।

सीएसआर बढ़ने से लंबी ट्रेनों को यार्ड में अधिक प्रभावी ढंग से संभालने और ट्रेनों के संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्नील निला ने बताया कि जौलखेड़ा यार्ड में नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के सफल समापन से यार्ड की क्षमता, परिचालन लचीलापन और ट्रेनों के प्रबंधन की दक्षता में वृद्धि होगी। उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली और आधुनिक यार्ड अवसंरचना से इस रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित, सुचारु और कुशल बनाने में मदद मिलेगी।

इटारसी?नागपुर तीसरी लाइन परियोजना के तहत जौलखेड़ा यार्ड में किया गया यह कार्य रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और बढ़ती यातायात क्षमता को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।