लंबित पंचायत ऑडिट प्रकरणों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश

लंबित पंचायत ऑडिट प्रकरणों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश

सीडीओ मृणाली अविनाश जोशी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक, वर्षों से लंबित ऑडिट आपत्तियों का लिया संज्ञान

मुरादाबाद। मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी की अध्यक्षता में सोमवार को क्षेत्र पंचायत ऑडिट प्रपत्रों के लंबित प्रकरणों के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद के सभी विकास खंडों में लंबित ऑडिट आपत्तियों और प्रपत्रों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।

सीडीओ ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि लंबित ऑडिट प्रकरणों का बिना विलंब अभिलेखों के आधार पर तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए संबंधित अभिलेखों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए, ताकि लंबे समय से लंबित प्रकरणों का निस्तारण हो सके।

बैठक में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के 12, वर्ष 2019-20 के 5 तथा वर्ष 2020-21 के 86 ऑडिट प्रपत्र अभी लंबित हैं। सीडीओ ने इन सभी प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी के अलावा जिला विकास अधिकारी श्वेतांक पाण्डेय, जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा, जिला पंचायत राज कार्यालय के लेखाकार अनुज सिंह तथा विभिन्न विकास खंडों में तैनात लेखाकार उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान विकास खंड भगतपुर टांडा में ग्राम पंचायतों में संचालित विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, ग्रामीण आवास, आंगनबाड़ी केंद्र, फैमिली आईडी, पोषण, कृषि, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, विद्यालय प्रेरणा ऐप और आश्रय स्थल से संबंधित कार्यों की प्रगति एवं स्थिति की जानकारी ली गई।

सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ अभिलेखों का व्यवस्थित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने और विकास कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया।

समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति से सीडीओ को अवगत कराया। सीडीओ ने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए लंबित ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए।