धमतरी कृषि विभाग में दोषी REO पर उच्च अफ़सरों का 'वरदहस्त'! जांच रिपोर्ट को दरकिनार कर गवाहों को गुमराह करने का खेल...जांच में दोषी पुष्टि के बावजूद बचाव में जुटा अमला


धमतरी (नगरी)। विकास खंड नगरी के कृषि विभाग में उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 की धज्जियां उड़ाने, अवैध निरीक्षण करने और व्यापारियों से अवैध वसूली के संगीन आरोपों से घिरे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी व तत्कालीन प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) का मामला अब एक नए विवाद में घिर गया है। सूत्रों से मिली सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद उप संचालक कृषि (DDA) धमतरी द्वारा आरोपी अधिकारी को बचाने के लिए कड़े जतन किए जा रहे हैं। मामला अब महज एक अधिकारी के कथित भ्रष्टाचार तक सीमित न रहकर सीधे तौर पर जिला स्तर के आला अधिकारी की संदिग्ध और पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली पर आ टिका है, जिससे कृषि विभाग की साख पूरी तरह तार-तार हो रही है।
पूरे मामले की शुरुआत जून 2026 में हुई थी, जब क्षेत्र के एक जागरूक नागरिक ने उक्त REO द्वारा बिना किसी कानूनी अधिकार के निजी व सहकारी खाद दुकानों के अवैध निरीक्षण और वसूली की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज कराई थी। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए उप संचालक कृषि मोनेश साहू द्वारा राजपत्रित अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया था। इस उच्चस्तरीय जांच टीम ने मौके पर जाकर विस्तृत पड़ताल की और अपनी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट में संबंधित REO को उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के उल्लंघन, अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर भौतिक सत्यापन करने तथा व्यापारियों से अवैध वसूली करने का पूर्णतः दोषी पाया। जांच टीम की इस स्पष्ट और तथ्यपरक रिपोर्ट के आधार पर उप संचालक कृषि ने आरोपी अधिकारी को बिंदुवार आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी कर जवाब तलब किया था।
असली खेल आरोप पत्र का जवाब आने के बाद शुरू हुआ। सूत्र बताते हैं कि आरोप सिद्ध REO द्वारा विभागीय कार्यवाही से बचने के लिए गुमराह करने वाला और भ्रामक जवाब प्रस्तुत किया गया। ताज्जुब की बात यह है कि एक राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व वाली जांच टीम की रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए उप संचालक कृषि मोनेश साहू ने उक्त के उस गोलमोल जवाब को न केवल सही मान लिया, बल्कि मामले को रफा-दफा करने के लिए नियम-कायदों की जमकर धज्जियां उड़ानी शुरू कर दीं। बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त होने और जांच रिपोर्ट की प्रति संचालक कृषि रायपुर को भेजे जाने के बावजूद, उप संचालक कृषि द्वारा गवाहों को डराने-धमकाने और गुमराह करने की नीयत से अपने दफ्तर बुलाया जा रहा है, ताकि गवाही को बदलवाकर दोषी अधिकारी को क्लीन चिट दी जा सके।


राजपत्रित अधिकारियों की टीम द्वारा तैयार की गई निष्पक्ष जांच रिपोर्ट को खारिज करने और एक प्रमाणित दोषी को संरक्षण देने का यह प्रयास कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा कलंक लगा रहा है। राज्य शासन के सर्वोच्च तंत्र यानी रायपुर तक मामला पहुंचने के बाद भी जिला स्तर पर जिस बेखौफ अंदाज में जांच को प्रभावित करने और गवाहों पर दबाव बनाने का खेल खेला जा रहा है, उससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे सिंडिकेट में ऊंचे पद पर बैठे अधिकारियों के हित भी जुड़े हुए हैं। उप संचालक कृषि मोनेश साहू की इस पक्षपातपूर्ण भूमिका से स्थानीय खाद व्यापारियों, किसानों और जागरूक नागरिकों में भारी आक्रोश पनप रहा है। लोगों का कहना है कि जब जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि हो चुकी है, तब दोषी पर अनुशासनात्मक , दंडात्मक कार्यवाही करने के बजाय उसे बचाने का यह षड्यंत्र शासन की शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) नीति पर सीधा प्रहार है। अब देखना यह होगा कि कृषि संचालनालय रायपुर इस मामले का संज्ञान लेकर उप संचालक कृषि की इस संदिग्ध भूमिका पर क्या सख्त कदम उठाता है।

हलकों मामले में जिला कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि अभी फिलहाल पद से हटाया गया है कार्यवाही प्रक्रियाधीन है निश्चित ही कार्यवाही सुनिश्चित की जावेगी