निरीक्षण एवं वसूली के संगीन आरोपों का मामला

धमतरी (नगरी)

विकास खंड नगरी के कृषि विभाग में प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) पर लगे अवैध निरीक्षण एवं वसूली के संगीन आरोपों का मामला अब प्रशासनिक शिथिलता और संदिग्ध कार्यप्रणाली के चलते और अधिक गरमा गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे मामले की जांच के लिए गठित जांच अधिकारी ने अपनी संपूर्ण जांच रिपोर्ट बीते शुक्रवार, 24 जुलाई को ही सक्षम प्राधिकारी यानी उप संचालक कृषि (DDA) धमतरी को सौंप दी है। हालांकि, जांच प्रतिवेदन जमा हुए तीन दिन बीत जाने के बाद भी उप संचालक कृषि द्वारा संबंधित अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। रिपोर्ट टेबल पर धूल फांक रही है और अधिकारियों की यह चुप्पी अब गंभीर विभागीय संरक्षण तथा गहरे संदेह के दायरे में आ खड़ी हुई है।

पूरा मामला उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 के खुले उल्लंघन और व्यापारियों से कथित अवैध वसूली से जुड़ा है। फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर की गैरमौजूदगी में बिना किसी कानूनी अधिकार के निजी व सहकारी खाद दुकानों का भौतिक सत्यापन करने के गंभीर आरोपों की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मामले की प्रशासनिक जांच कराई गई। लेकिन जांच रिपोर्ट जमा होने के बाद भी जिला स्तर से कार्यवाही करने में दिखाई जा रही ढिलाई से सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी दोषी को बचाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं?

इसी बीच, पूरे प्रकरण में नियमों को दरकिनार करने का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। नियमों के मुताबिक जब तक किसी अधिकारी पर आधिकारिक रूप से आरोप सिद्ध न हो जाएं या उसे औपचारिक आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी न कर दिया जाए, तब तक अभ्यावेदन (Representation) जैसी प्रक्रिया का सवाल ही नहीं उठता। इसके बावजूद, उक्त प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किए गए अभ्यावेदन को उप संचालक कृषि द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि बिना आरोप पत्र जारी हुए अभ्यावेदन को स्वीकार करना सीधे-सीधे स्थापित सेवा नियमों और विभागीय प्रक्रियाओं का खुला उल्लंघन है। एक तरफ जहां पीड़ित व्यापारी और शिकायतकर्ता जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभागीय स्तर पर उक्त अधिकारी को दी जा रही यह राहत कई सवाल खड़े करती है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही को ठंडे बस्ते में डालने और नियम विरुद्ध प्रक्रिया अपनाने से स्थानीय व्यापारियों व जागरूक नागरिकों में भारी असंतोष व्यापत है। लोगों का कहना है कि जब जांच रिपोर्ट आ चुकी है, तो आखिर उप संचालक कृषि किस दबाव या निष्ठा के तहत कार्यवाही से बच रहे हैं? यदि जल्द ही दोषी अधिकारी पर सख्त कदम नहीं उठाए गए और निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित नहीं हुई, तो व्यापारी संघ और क्षेत्रीय नागरिक इस मामले को लेकर आंदोलन और उच्चस्तरीय शिकायत करने की तैयारी में है।