दृष्टिबाधित रेलकर्मियों को मिला तकनीक का सहारा, उत्तर रेलवे ने बांटे 123 ज्योति एआई स्मार्ट ग्लास

दिल्ली। दृष्टिबाधित रेल कर्मचारियों को आत्मनिर्भर और कार्यकुशल बनाने की दिशा में उत्तर रेलवे ने महत्वपूर्ण पहल की है। राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, चाणक्यपुरी में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पाण्डेय ने दृष्टिबाधित कर्मचारियों को 123 ज्योति एआई स्मार्ट ग्लासेस वितरित किए।

मेक इन इंडिया के तहत टॉर्च ईट कंपनी द्वारा विकसित इन स्मार्ट ग्लासेस का उद्देश्य दृष्टिबाधित कर्मचारियों को आधुनिक सहायक तकनीक उपलब्ध कराकर उनके आधिकारिक कार्यों को आसान, सुगम और प्रभावी बनाना है। इससे कर्मचारियों को कार्यस्थल के साथ-साथ दैनिक जीवन में भी अधिक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ काम करने में मदद मिलेगी।

महाप्रबंधक राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि उत्तर रेलवे द्वारा दृष्टिबाधित कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से युक्त स्मार्ट ग्लास उपलब्ध कराना समावेशी कार्यस्थल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस पहल से उत्तर रेलवे के कुल 123 दृष्टिबाधित कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रथम चरण में प्रधान कार्यालय के 16 दृष्टिबाधित कर्मचारियों को स्मार्ट ग्लास दिए जा चुके हैं।

मुरादाबाद मंडल के 19 कर्मचारी होंगे लाभान्वित

उत्तर रेलवे द्वारा वितरित 123 स्मार्ट ग्लासेस में मुरादाबाद मंडल के 19 दृष्टिबाधित कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यालय के 17, दिल्ली मंडल के 28, लखनऊ मंडल के 13, अंबाला मंडल के 10, फिरोजपुर मंडल के 5, आलमबाग वर्कशॉप के 19, जगाधरी वर्कशॉप के 3 और चारबाग वर्कशॉप के 9 कर्मचारियों को स्मार्ट ग्लास प्रदान किए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान दृष्टिबाधित कर्मचारियों ने स्मार्ट ग्लास के उपयोग और उनकी उपयोगिता को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कर्मचारियों ने बताया कि यह तकनीक उनके दैनिक कार्यों को अधिक आसानी और प्रभावी तरीके से पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।

कार्यक्रम में अपर महाप्रबंधक हर्ष खरे, प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी सुजीत कुमार मिश्रा, सभी विभागाध्यक्ष तथा उत्तर रेलवे की मान्यता प्राप्त यूनियनों एवं संघों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

उत्तर रेलवे की यह पहल दिव्यांग कर्मचारियों के लिए समान अवसर, समावेशिता और आधुनिक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। रेलवे का उद्देश्य है कि प्रत्येक कर्मचारी को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर वह अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर सके।