एटा: भूमि माफियाओं का तांडव, प्राचीन शीतला माता मंदिर पर हमला, प्रशासन की नाक में दम.!

*एटा: भूमि माफियाओं का तांडव, प्राचीन शीतला माता मंदिर पर हमला; प्रशासन की नाक में दम!*�


संवाददाता: रमेश जादौन सिटी अपडेट न्यूज़!✍️

एटा। जलेसर तहसील के ग्राम इसौली की नीलकोठी भूमि पर स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर, हौद, मेड़बंदी और सीमांकन चिन्हों पर भूमि माफियाओं ने खुलेआम कब्जा करने का दुस्साहस किया है। मंदिर परिसर में खड़े हरे पेड़ों की अवैध कटाई, हौद तोड़ना और बार-बार मेड़ें ध्वस्त करना?यह सब सरकारी संपत्ति और धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार है। राष्ट्रीय हनुमान दल के जिलाध्यक्ष दलवीर सिंह ने मंगलवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि अगर 5 दिन के अंदर प्रशासन बाउंड्री नहीं बनवाता और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं करता, तो अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।ज्ञापन में साफ लिखा गया है कि ग्राम सभा इसौली की गाटा संख्या 1215 और 1216 की यह भूमि ग्रामवासियों की धार्मिक आस्था, सार्वजनिक उपयोग और ग्राम सभा की संपत्ति से जुड़ी हुई है। फिर भी भू-माफियाओं ने सीमांकन तोड़ा, मेड़ें बार-बार क्षतिग्रस्त कीं, नीलकोठी की हौद को ध्वस्त कर दिया और हरे पेड़ों की अवैध कटाई कर डाली। इन कुकृत्यों से न सिर्फ सरकारी संपत्ति बर्बाद हुई, बल्कि धार्मिक स्थल की पवित्रता और पर्यावरणीय संतुलन पर भी गहरी चोट पहुंची है।हनुमान दल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर निर्धारित समय-सीमा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो इसे प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत माना जाएगा। ऐसी स्थिति में जनभावना आहत होगी और राष्ट्रीय हनुमान दल सहित अन्य हिंदूवादी संगठन शीतला माता मंदिर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।ज्ञापन में तत्काल संयुक्त राजस्व-पुलिस निरीक्षण, मंदिर परिसर, हौद, मेड़बंदी और सीमांकन चिन्हों को सुरक्षित करने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई, 5 दिन के अंदर बाउंड्री निर्माण और चेतावनी बोर्ड व पुलिस निगरानी की मांग की गई है। वन विभाग को भी पेड़-कटाई की जांच के लिए अलग से सूचना देने की बात कही गई है।प्रश्न यह है कि प्रशासन कब तक भूमि माफियाओं के आगे घुटने टेकेगा? प्राचीन मंदिर और ग्राम सभा की जमीन की रक्षा करना प्रशासन का कर्तव्य है, न कि चुप्पी साधना। अगर तुरंत कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो जन-आक्रोश का विस्फोट होना तय है।


रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।