स्वच्छ भारत मिशन की खुली पोल : पुनाली में 5 वर्षों से अधूरा पड़ा सामुदायिक शौचालय, कछुआ चाल से चल रहा निर्माण कार्य

ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल का भी लगाया आरोप, ग्राम पंचायत की घोर लापरवाही पर की कड़ी निंदा

संवाददाता ? संतोष व्यास

डूंगरपुर। स्वच्छ भारत मिशन को गति देने के सरकारी दावों और भारी-भरकम बजट आवंटन के बावजूद धरातल पर प्रशासनिक लापरवाही और पंचायती रवैये के चलते जनसुविधाएं अधर में लटकी हुई हैं। मामला जिले के दोवडा पंचायत समिति के ग्राम पंचायत पुनाली के अंतर्गत ग्राम वाडा पुनाली का है, जहाँ आदिवासी बस्ती में पिछले 5 सालों से एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कछुआ चाल से चल रहा है, जो आज तक अधूरा पड़ा है। लाखों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद योजना का लाभ न मिलने से पूरी आदिवासी बस्ती में गहरा आक्रोश और नाराजगी व्याप्त है।

- 5 सालों से अधूरा निर्माण, घटिया सामग्री का उपयोग

गांव के रामसिंह रघुवंशी एवं ग्रामीण अशोक कुमार बुझ ने पंचायत प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए बताया कि यह ग्राम पंचायत की घोर लापरवाही का ही नतीजा है कि पिछले 5 वर्षों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। शौचालय का निर्माण न केवल अधूरा छोड़ा गया है, बल्कि निर्माण कार्य में अत्यंत घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके चलते आदिवासी बस्ती के दर्जनों परिवारों को आज भी शौचालय की मूलभूत सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है और वे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं।

- लाखों का बजट, फिर भी कछुआ चाल

उल्लेखनीय है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत राजस्थान सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय के निर्माण हेतु लगभग 2 से 3 लाख रूपये का बजट स्वीकृत किया जाता है। इसके बावजूद, मनरेगा के तहत मजदूर व कारीगर लगाकर कछुआ चाल से कार्य कराया जा रहा है, जिसके चलते 5 साल बीत जाने के बाद भी शौचालय उपयोग योग्य नहीं बन सका है। यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक मंशा और वित्तीय निष्पादन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

- ग्रामीणों में गहरा आक्रोश, जांच की मांग

सामुदायिक शौचालय के अधूरा रहने और बजट के दुरुपयोग की आशंका को लेकर समस्त आदिवासी बस्ती के लोगों ने एकत्र होकर ग्राम पंचायत के इस उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं किस प्रकार निचले स्तर पर लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं, यह इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

पीड़ित ग्रामीणों ने प्रशासन व उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे शौचालय निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा स्वीकृत बजट के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, दोषी अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करते हुए जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूर्ण करवाकर शौचालय शुरू कराया जाए।

- मौके पर मौजूद ग्रामीण:

विरोध दर्ज कराने एवं निष्पक्ष जांच की मांग करने वालों में रामसिंह रघुवंशी, अशोक कुमार बुझ, पुंजीलाल खराड़ी, गेगा दायमा, भाईराम, कमलेश दायमा, शांतिलाल, रमेश, जीवा, सुखदेव, लक्ष्मण खराड़ी, कांतिलाल सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।