कतार से क्लिक तक: 40 साल में बदली भारतीय रेलवे की टिकट बुकिंग, अब हर मिनट 1.5 लाख टिकट बुक करने की तैयारी

भारतीय रेलवे की यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) ने चार दशक में लंबा सफर तय करते हुए मैन्युअल टिकट बुकिंग से अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तक की यात्रा पूरी कर ली है। वर्ष 1986 में शुरू हुई यह प्रणाली आज दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रेलवे आरक्षण व्यवस्थाओं में शामिल है और हर दिन लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और पारदर्शी टिकट बुकिंग की सुविधा दे रही है।

रेलवे अब अगली पीढ़ी की क्लाउड आधारित पीआरएस प्रणाली लागू कर रहा है। इसके तहत मौजूदा 32 हजार टिकट प्रति मिनट की क्षमता बढ़ाकर 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट और 4 लाख पूछताछ प्रति मिनट की क्षमता बढ़ाकर 40 लाख से अधिक पूछताछ प्रति मिनट करने की तैयारी है। नई प्रणाली में बहुभाषी इंटरफेस, तेज बुकिंग और बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।

रेलवे के अनुसार जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के माध्यम से 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ (89 प्रतिशत) टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यह रेलवे सेवाओं के तेजी से डिजिटलीकरण और यात्रियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

भारतीय रेलवे ने हाल के वर्षों में कई बड़े सुधार किए हैं। अग्रिम आरक्षण अवधि को 120 दिन से घटाकर 60 दिन किया गया है, जबकि तत्काल टिकट बुकिंग में आधार प्रमाणीकरण और ओटीपी सत्यापन लागू कर पारदर्शिता बढ़ाई गई है। जुलाई 2026 में नई आईआरसीटीसी वेबसाइट का बीटा संस्करण भी शुरू किया गया है, जिसमें कम स्टेप में टिकट बुकिंग और सभी श्रेणियों में सीट उपलब्धता जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) द्वारा विकसित रेलवन, रेलकनेक्ट, यूटीएस, एनटीईएस और रेलमदद जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की लाइव जानकारी, शिकायत निवारण और अन्य सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध करा रहे हैं। रेलवन ऐप में एआई आधारित वेटिंग टिकट कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन जैसी आधुनिक सुविधा भी जोड़ी गई है।

भारतीय रेलवे का कहना है कि नई पीढ़ी की यात्री आरक्षण प्रणाली भविष्य की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इससे टिकट बुकिंग पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय होगी तथा यात्रियों को एक बेहतर और परेशानी मुक्त डिजिटल अनुभव मिलेगा।