रेलवे में बिना टिकट और आरक्षित कोच में घुसने वालों पर अब सख्ती, नियम तोड़ने पर बढ़ा जुर्माना

मुंबई। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और नियमों के प्रभावी पालन के लिए रेलवे अधिनियम, 1989 की कई महत्वपूर्ण धाराओं में संशोधन किया है। मध्य रेल ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत बिना टिकट यात्रा, आरक्षित डिब्बों में अनधिकृत प्रवेश, महिलाओं के कोच में अवैध प्रवेश और टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त जैसे मामलों में अब पहले से अधिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नए नियमों के अनुसार बिना वैध टिकट यात्रा करने पर यात्री को किराया और अतिरिक्त प्रभार देना होगा, जिसकी न्यूनतम राशि 500 रुपये होगी। भुगतान से इनकार करने पर मामला न्यायालय भेजा जाएगा, जहां कारावास या जुर्माने का प्रावधान रहेगा।

आरक्षित कोच में बिना अधिकार प्रवेश करने पर अब 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति वास्तविक आरक्षित यात्री के प्रवेश में बाधा उत्पन्न करता है तो उस पर 1,000 रुपये तक का दंड लगाया जाएगा। जुर्माना न भरने पर मामला अदालत में जाएगा, जहां 3,000 रुपये तक का जुर्माना और कोच से हटाने का आदेश दिया जा सकता है।

महिलाओं के लिए आरक्षित कोच में अनधिकृत प्रवेश करने वालों पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। ऐसे मामलों में अब 2,500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। भुगतान नहीं करने पर न्यायालय 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। हालांकि, इस प्रावधान के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

रेलवे ने टिकटों की अवैध खरीद-फरोख्त पर भी शिकंजा कसा है। अनधिकृत रूप से टिकट खरीदने या बेचने पर टिकट जब्त किया जाएगा तथा किराया और अतिरिक्त प्रभार वसूला जाएगा। भुगतान नहीं करने पर 6 माह तक की जेल या 2,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

इसी तरह वैध टिकट की निर्धारित दूरी से अधिक यात्रा करने पर भी अब न्यूनतम 500 रुपये अतिरिक्त प्रभार देना होगा। भुगतान नहीं करने पर मामला न्यायालय में भेजा जाएगा।

मध्य रेल ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे हमेशा वैध टिकट के साथ यात्रा करें, आरक्षित कोच और सीटों के नियमों का पालन करें तथा रेलवे कर्मचारियों का सहयोग करें। रेलवे का कहना है कि इन संशोधित नियमों से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा।