चाइल्ड केयर लीव पर हाईकोर्ट का कड़ा शिकंजा, बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को नोटिस

डॉ. शिवानी सिंह की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, जवाब के लिए मिला अंतिम तीन सप्ताह का समय, अब टालमटोल पर उठे सवाल

चंदौली। बाबा कीनाराम ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेज से जुड़े चाइल्ड केयर लीव (CCL) के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अमित सिंह को नोटिस जारी किया है। महिला डॉक्टर द्वारा बच्चे की देखभाल के लिए मांगी गई छुट्टी के मामले में न्यायालय की सख्ती के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।मामला कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में सीनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत रहीं डॉ. शिवानी सिंह से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार गर्भावस्था के बाद उन्होंने अपने बच्चे की देखभाल के लिए कॉलेज प्रशासन से Child Care Leave (CCL) की मांग की थी। आरोप है कि उनकी ओर से प्रस्तुत अवकाश संबंधी अनुरोध पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई।

अधिकार के लिए हाईकोर्ट पहुंचीं महिला डॉक्टर

कॉलेज प्रशासन से राहत नहीं मिलने के बाद डॉ. शिवानी सिंह ने अपने सेवा संबंधी अधिकारों और चाइल्ड केयर लीव के मुद्दे को लेकर 23 अप्रैल 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की।मामले की सुनवाई के दौरान 13 मई 2026 को हाईकोर्ट ने कॉलेज के प्रिंसिपल को आवश्यक जवाब/कार्रवाई के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था। याचिकाकर्ता की ओर से बाद में यह आरोप लगाया गया कि न्यायालय द्वारा समय दिए जाने के बावजूद अपेक्षित अनुपालन नहीं किया गया।

समय बीता, कार्रवाई नहीं हुई तो दायर हुई अवमानना याचिका

न्यायालय द्वारा निर्धारित समय में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए डॉ. शिवानी सिंह ने दोबारा हाईकोर्ट का रुख किया। 23 जुलाई 2026 को मामले में अवमानना (Contempt) की कार्यवाही के लिए याचिका दाखिल की गई।इसके बाद 30 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल को अंतिम अवसर प्रदान किया। न्यायालय ने जवाब/अनुपालन दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का अंतिम समय दिया है।

अंतिम अवसर के बाद बढ़ा दबाव

हाईकोर्ट की ओर से अंतिम अवसर दिए जाने के बाद अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन का दबाव बढ़ गया है। सवाल यह भी है कि जब न्यायालय पहले ही निर्धारित समय दे चुका था, तो उसके बाद भी मामला अवमानना की स्थिति तक क्यों पहुंचा?

अब कॉलेज प्रशासन को निर्धारित अवधि के भीतर हाईकोर्ट के समक्ष अपना स्पष्ट पक्ष और आवश्यक अनुपालन प्रस्तुत करना होगा।

मामला सिर्फ छुट्टी का नहीं, महिला कर्मचारी के अधिकारों का सवाल

चाइल्ड केयर लीव का यह मामला महज एक छुट्टी के विवाद तक सीमित नहीं है। यह महिला डॉक्टरों के मातृत्व, बच्चे की देखभाल और सेवा संबंधी अधिकारों से जुड़े व्यापक सवाल खड़े करता है।एक ओर सरकार और न्यायपालिका महिला कर्मचारियों को मातृत्व एवं बाल देखभाल से जुड़े अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यदि किसी महिला डॉक्टर को अपने बच्चे की देखभाल के लिए मांगी गई छुट्टी के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़े, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।अब हाईकोर्ट द्वारा दिए गए अंतिम तीन सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बाबा कीनाराम ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की ओर से न्यायालय के समक्ष क्या जवाब दाखिल किया जाता है और मामले में क्या अनुपालन प्रस्तुत किया जाता है।