नेपाल में मनाया गया धूम-धाम से आषाढ़ शुक्ल एकादशी का पर्व।

वाल्मीकि नगर से अभिमन्यु कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।हर वर्ष की भाति इस वर्ष भी आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन मनाया जाने वाला हरिशयनी एकादशी शनिवार को नवलपरासी जिला में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर त्रिवेणी के संगम तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान दान कर अपने अपने घर में तुलसी का पौधा लगा कर पूजा अर्चना किया गया।त्रिवेणी के ज्योतिषाचार्य जगदीश उपाध्याय ने बताया कि सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार तुलसी के पौधा को भगवान विष्णु का प्रतीक चिन्ह के रूप में जाता है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार महीना भगवान विष्णु क्षीण सागर में शयन करने के लिए चले जाते है। इसलिए आज के दिन को हरिशयनी एकादशी कहा जाता है। भगवान विष्णु को चार महीने के लिए शयन में जाने के कारण इन चार महीना को चातुर्मास भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं के द्वारा चार महीने तक अपने घर में लगाए गए तुलसी के पौधा का विधि विधान से पूजा अर्चना किया जाता है। और फिर चार महीने के बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात हरिवोधनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधा का विवाह दामोदर के साथ कर देने का विधान है। तुलसी और दामोदर के विवाह के पश्चात अग्नि स्थापना का विधि पूर्वक हवन कर चतुर्मास व्रत का अध्यापन किया जाता है।