मानसून में सुरक्षा के लिए उत्तर मध्य रेलवे का बड़ा कदम, आरयूबी निगरानी के लिए लागू किया उन्नत डिजिटल प्रोटोकॉल

प्रयागराज। मानसून के दौरान रेल और सड़क यातायात को सुरक्षित एवं सुचारु बनाए रखने के लिए उत्तर मध्य रेलवे ने रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की निगरानी और जलभराव प्रबंधन हेतु अत्याधुनिक ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) आधारित प्रोटोकॉल लागू किया है। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व में शुरू की गई यह व्यवस्था तकनीक आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखेगी।

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मंडल में एडीईएन-वार मानसून व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिनमें प्रति घंटे वर्षा की जानकारी और प्रभावित आरयूबी की जियो-टैग तस्वीरें साझा की जाएंगी। सभी आरयूबी की दिन में दो बार निगरानी की जाएगी तथा जलभराव की स्थिति बीएमएस पोर्टल पर रियल-टाइम अपडेट होगी। पानी निकलने के बाद बहाली की पुष्टि भी डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी।

रेलवे ने जलभराव के आधार पर आरयूबी को अलग-अलग संवेदनशील श्रेणियों में विभाजित किया है। 5 से 20 सेंटीमीटर तक जलभराव वाले आरयूबी का प्रत्येक 15 दिन में निरीक्षण किया जाएगा, जबकि 20 सेंटीमीटर से अधिक जलभराव वाले आरयूबी का सप्ताह में एक बार निरीक्षण अनिवार्य होगा। यदि किसी आरयूबी में 50 सेंटीमीटर से अधिक पानी छह घंटे से ज्यादा समय तक भरा रहता है तो उसे गंभीर स्थिति माना जाएगा।

यात्रियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरयूबी में जलभराव 30 सेंटीमीटर से अधिक हो जाता है तो पानी पूरी तरह निकलने तक उसे सड़क यातायात के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर चौकीदार तैनात किए गए हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर चेन लगाकर मार्ग बंद करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई वाहन जलभराव में न फंसे।

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ जल निकासी कलवर्ट केवल पानी की निकासी के लिए बनाए गए हैं, न कि आम आवागमन के लिए। ऐसे ढांचों को आरयूबी या एलएचएस समझकर भ्रमित होने से बचने की अपील की गई है।

उत्तर मध्य रेलवे का कहना है कि सक्रिय योजना, डिजिटल निगरानी और पारदर्शी संचार के माध्यम से मानसून के दौरान यात्रियों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।