लूनी यार्ड में रेलवे का बड़ा तकनीकी अभियान, बदले गए 8 टर्नआउट; 130 किमी प्रति घंटा रफ्तार का रास्ता हुआ मजबूत

जोधपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने रेल संरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लूनी यार्ड में आधुनिक टी-28 मशीन की सहायता से 8 टर्नआउट सफलतापूर्वक बदल दिए गए हैं। इस कार्य के साथ लूनी?मारवाड़ जंक्शन रेलखंड पर ट्रैक आधुनिकीकरण का अहम चरण पूरा हो गया है।

मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि अभियान के दौरान घुमावदार ट्रैक पर स्थित तकनीकी रूप से जटिल टर्नआउट भी बदले गए। ऐसे स्थानों पर कार्य करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन रेलवे की टीम ने निर्धारित समय में पूरे अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया।

इस कार्य के बाद लूनी?मारवाड़ जंक्शन रेलखंड की मुख्य लाइन पर लगे सभी टर्नआउट अब 60 किलोग्राम रेल सेक्शन के हो गए हैं। इससे ट्रैक की मजबूती और स्थायित्व में वृद्धि हुई है। साथ ही भविष्य में इस रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम गति 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, गति बढ़ाने से पहले रेलवे को सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस अभियान में इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूरसंचार तथा ऑपरेटिंग विभागों ने बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया। सभी विभागों के तालमेल से बिना किसी बड़ी परिचालन बाधा के यह महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

डीआरएम ने कहा कि ट्रैक के इस आधुनिकीकरण से रेल संचालन पहले से अधिक सुरक्षित, सुचारु और विश्वसनीय होगा। आने वाले समय में यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक रेल यात्रा का लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या होता है टर्नआउट?

टर्नआउट रेलवे ट्रैक का वह विशेष हिस्सा होता है, जिसकी सहायता से ट्रेन को एक पटरी से दूसरी पटरी पर ले जाया जाता है। इसे सामान्य भाषा में 'पॉइंट्स' भी कहा जाता है। रेलवे स्टेशन, यार्ड और लूप लाइन पर इसका उपयोग ट्रेनों का मार्ग बदलने के लिए किया जाता है। 60 किलोग्राम रेल सेक्शन वाले मजबूत टर्नआउट ट्रैक की मजबूती और सुरक्षा बढ़ाते हैं तथा भविष्य में अधिक गति से ट्रेन संचालन का आधार तैयार करते हैं।