सरकारी भूमि पर कब्जों से मुक्ति और निष्पक्ष न्याय की उठी मांग

रायबरेली।ऊँचाहार तहसील में शासन की मंशा के अनुरूप जनहित के कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा राजस्व प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग तेज हो गई है।क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं,जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि तहसील में कर्मठ,निष्पक्ष और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील राजस्व कर्मचारियों की आवश्यकता है,जो आम जनता की पीड़ा को समझते हुए सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण के मामलों में बिना किसी दबाव के कार्रवाई सुनिश्चित कर सके।ग्रामीणों का कहना है कि तहसील के अनेक गांवों से ग्राम सभा की भूमि,तालाब,खलिहान, चारागाह,चकमार्ग और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जों की शिकायतें लगातार जिलाधिकारी,मंडलायुक्त और शासन स्तर तक भेजी जा रही हैं।इसके बावजूद कई मामलों में कार्रवाई अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है।लोगों का मानना है कि यदि तहसील में जनहित के प्रति समर्पित और कानून के अनुसार निर्णय लेने वाला अधिकारी हो,तो वर्षों से लंबित राजस्व विवादों का समाधान संभव है और सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सकता है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि ग्राम सभा की भूमि केवल सरकारी संपत्ति नहीं,बल्कि गांव की सामूहिक धरोहर है।तालाब, खलिहान और चारागाह पर कब्जों से ग्रामीणों के अधिकार प्रभावित होते हैं और विकास कार्य भी बाधित होते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई समय की आवश्यकता है।क्षेत्र के लोगों ने जिलाधिकारी एवं मंडलायुक्त से मांग की है कि ऊँचाहार तहसील की प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा कर ऐसे ईमानदार, विवेकशील और कानून का निष्पक्ष पालन कराने वाले राजस्व अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए,जो शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करते हुए सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने और आम जनता को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी पहल कर सके। उनका कहना है कि इससे न केवल सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा होगी,बल्कि प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।