कबाड़ बना कमाई का जरिया: जोधपुर रेल मंडल ने तीन महीने में कमाए 7.41 करोड़ रुपये

कबाड़ बना कमाई का जरिया: जोधपुर रेल मंडल ने तीन महीने में कमाए 7.41 करोड़ रुपये

जोधपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे का जोधपुर मंडल अनुपयोगी संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के जरिए राजस्व बढ़ाने में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मंडल ने 2034 मीट्रिक टन कबाड़ का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर 7.41 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 7 प्रतिशत अधिक है।

मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 1904 मीट्रिक टन कबाड़ की बिक्री से 6.94 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इस वर्ष 130 मीट्रिक टन अधिक कबाड़ का निस्तारण किया गया, जिससे रेलवे को 48 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।

उन्होंने बताया कि रेलवे में कबाड़ के अंतर्गत पुराने रेल ट्रैक, स्लीपर, सिग्नल एवं विद्युत उपकरण, कोच और वैगनों के पुर्जे, लोहे-स्टील की सामग्री, मशीनरी तथा अन्य अनुपयोगी वस्तुएं शामिल होती हैं। इनका निर्धारित प्रक्रिया के तहत वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाता है।

डीआरएम ने कहा कि कबाड़ के नियमित निस्तारण से रेलवे को अतिरिक्त राजस्व मिलने के साथ-साथ यार्डों और कार्यशालाओं में जगह खाली होती है, जिससे रखरखाव और परिचालन कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से किए जा सकते हैं। साथ ही कबाड़ की रीसाइक्लिंग से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलता है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, समयबद्ध कबाड़ निस्तारण से न केवल रेलवे की कार्यकुशलता बढ़ती है, बल्कि परिसरों में स्वच्छता और सुव्यवस्था भी बनी रहती है। इससे रेलवे की परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होने के साथ-साथ संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग भी संभव हो रहा है।