* मैदान गढ़ी गांव में खुद बीमार चल रहा बेजुबानों का हॉस्पिटल *

**मैदानगढ़ी: बदहाली के आंसू रो रहा सरकारी वेटरनरी हॉस्पिटल, न डॉक्टर, न दवाइयां, बेजुबान हो रहे परेशान**

**मैदानगढ़ी।** स्थानीय सरकारी पशु अस्पताल (वेटरनरी हॉस्पिटल) इस समय खुद 'बीमार' चल रहा है। अस्पताल की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि यहाँ आने वाले बीमार पशुओं का इलाज तो दूर, उन्हें प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पा रहा है।

अस्पताल परिसर में कदम रखते ही अव्यवस्थाओं का अंबार साफ नजर आता है। ग्राउंड जीरो पर स्थिति कुछ इस प्रकार है:

* *अस्पताल के मेडिकल स्टोर में ताला लटका रहता है या फिर अलमारियां खाली पड़ी हैं। छोटी से छोटी बीमारी के लिए भी पशुपालकों और पेट्स ( कुत्ता /बिल्ली ) को बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

* **रखरखाव का नामोनिशान नहीं:** अस्पताल की इमारत जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है, गंदगी का अंबार लगा है और चारों तरफ झाड़ियां उगी हुई हैं। बेजुबानों के लिए बना यह अस्पताल खुद हादसों को न्योता दे रहा है ।

> "जब भी कोई गाय या भैंस बीमार होती है, हम उम्मीद लेकर यहाँ आते हैं। लेकिन यहाँ न डॉक्टर मिलते हैं और न दवा। प्राइवेट डॉक्टरों को बुलाने में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं, जो हमारे बजट से बाहर है। सरकार को हमारी कोई फिक्र नहीं है।

3. * हर 6 महीने में एक बार " हँस गौशाला फाउंडेशन" की तरफ से और दिल्ली सरकार के अनुभवी टीम द्वारा साझा कैंप लगाया जाता है , जिसमें पशु और पेट्स को वेक्सिनेशन की कार्यवाही की जाती है। साल में सिर्फ दो बार जोकि उचित नहीं, डॉ एस बाला जी और इकबाल साहब मिलकर सिलसिला आगे बढ़ा रहे हैं। जोकि सिर्फ कामचलाऊ है , पर्याप्त नहीं ,