मानसून 2026: यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार मध्य रेल, जलभराव रोकने से लेकर घाट क्षेत्रों की सुरक्षा तक व्यापक इंतजाम

मानसून 2026: यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार मध्य रेल, जलभराव रोकने से लेकर घाट क्षेत्रों की सुरक्षा तक व्यापक इंतजाम

मुंबई। मानसून के मौसम में रेल यात्रियों को सुरक्षित, सुचारू और निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए मध्य रेल ने इस वर्ष व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। रेलवे प्रशासन ने मुंबई मंडल सहित पूरे नेटवर्क पर जलभराव की रोकथाम, जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और घाट सेक्शनों में विशेष सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, ताकि भारी बारिश के दौरान रेल संचालन प्रभावित न हो।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार मुंबई मंडल में ऐसे 117 स्थानों की पहचान की गई है, जहां मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति बन सकती है। इन क्षेत्रों में जल निकासी सुनिश्चित करने के लिए 12.5 एचपी से 100 एचपी क्षमता वाले 210 भारी-भरकम पंप तैनात किए जा रहे हैं। इसके साथ ही नालियों, पुलियों और पुलों के जलमार्गों की बड़े स्तर पर सफाई कर बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।

मध्य रेल ने बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील 18 प्रमुख स्थलों को चिन्हित कर विशेष इंजीनियरिंग कार्य शुरू किए हैं। इनमें सायन-कुर्ला, चुनाभट्टी-कुर्ला, विक्रोली-कंजुरमार्ग रोड और कुर्ला-तिलकनगर जैसे 6 महत्वपूर्ण स्थानों पर काम पूरा हो चुका है। वहीं पुलों के विस्तार, ट्रैक की ऊंचाई बढ़ाने और माइक्रो टनलिंग जैसे दीर्घकालिक कार्य वर्ष 2028 तक चरणबद्ध तरीके से जारी रहेंगे।

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि ठाणे माइक्रो टनलिंग परियोजना रही है, जिसे लगभग 5.50 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया। इस परियोजना के तहत रेलवे ट्रैक के नीचे माइक्रो टनलिंग तकनीक से 110 मीटर लंबी दो आरसीसी पाइपलाइन बिछाई गई हैं। इससे ठाणे स्टेशन पर वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है और मानसून में रेल संचालन अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद है।

रेलवे ने जल निकासी तंत्र को और मजबूत करने के लिए पूरे नेटवर्क पर पुलों के पुनर्निर्माण और जलमार्ग विस्तार कार्य भी तेज कर दिए हैं। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान कुल 42 पुल संवर्धन कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जबकि इस वर्ष भी कई नई परियोजनाओं पर काम जारी है।

मानसून के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले कल्याण-लोनावला-कर्जत और कसारा-इगतपुरी घाट सेक्शन पर भी विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इन क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने और मिट्टी कटाव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड और IIT के तकनीकी सुझावों के आधार पर आधुनिक सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। इनमें बोल्डर नेटिंग, चट्टान अवरोधक, फेंसिंग, गैबियन संरचनाएं, रिटेनिंग वॉल सुदृढ़ीकरण और सुरंग सुरक्षा कार्य प्रमुख हैं।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में किए गए इन सुरक्षा उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। घाट खंडों में चट्टान गिरने और मौसम जनित व्यवधानों में उल्लेखनीय कमी आई है। विशेष रूप से एमआईडी लाइन घाट सेक्शन वर्ष 2024 और 2025 के मानसून के दौरान बिना किसी पूर्ण यातायात अवरोध के सफलतापूर्वक संचालित हुआ, जिससे यात्री और मालगाड़ियों का संचालन निर्बाध बना रहा।

इसके अलावा रेलवे द्वारा बड़ी संख्या में पुलियों की सफाई, नालों की गाद निकालना, संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रैक रखरखाव, सुरंग निरीक्षण, स्टेशन प्लेटफार्मों और रेलवे भवनों को रिसाव मुक्त बनाना तथा संवेदनशील क्षेत्रों में मानसून गश्ती दलों की तैनाती भी की गई है।

मध्य रेल इस पूरे अभियान में एमसीजीएम, टीएमसी, केडीएमसी और एनएमएमसी जैसे स्थानीय निकायों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहा है। संयुक्त निरीक्षण और मानसून पूर्व बैठकों के जरिए आपात स्थिति से निपटने की रणनीति तैयार की गई है।

मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्नील निला ने बताया कि रेलवे प्रशासन मानसून 2026 के दौरान लाखों यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध रेल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पहले पूरी कर ली गई हैं।