नवगुरुकुल की पहल से मुरादाबाद की 7 बेटियों को मिला नया अवसर, निशुल्क तकनीकी शिक्षा के लिए बेंगलुरु रवाना

नवगुरुकुल की पहल से मुरादाबाद की 7 बेटियों को मिला नया अवसर, निशुल्क तकनीकी शिक्षा के लिए बेंगलुरु रवाना

ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत जनपद मुरादाबाद की 7 बेटियां सोमवार को बेंगलुरु के लिए रवाना हुईं। यह पहल नवगुरुकुल फाउंडेशन फॉर सोशल वेलफेयर संस्था के माध्यम से की गई है। चयनित छात्राओं को कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत निशुल्क स्कूल ऑफ बिजनेस पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया गया है, जिसका पूरा खर्च संस्था द्वारा वहन किया जाएगा। इन छात्राओं में राजकीय इंटर कॉलेज की छात्राएं भी शामिल हैं।

मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम संचालित किया गया। उन्होंने बताया कि नवगुरुकुल एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के युवाओं को निशुल्क तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कार्य कर रही है। संस्था अपने आवासीय और ऑनलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को सॉफ्टवेयर विकास, संवाद कौशल, व्यक्तित्व विकास तथा रोजगार से जुड़ा प्रशिक्षण उपलब्ध कराती है।

जिला विद्यालय निरीक्षक ऋतु तोमर ने बताया कि नवगुरुकुल का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रदान करना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को परियोजना आधारित शिक्षा, मार्गदर्शन, नेतृत्व विकास और कैरियर संबंधी सलाह भी दी जाती है।

सह जिला विद्यालय निरीक्षक शतानंद शर्मा ने कहा कि नवगुरुकुल का विश्वास है कि अच्छी शिक्षा और सही अवसर मिलने पर प्रत्येक युवा अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

इस कार्यक्रम के तहत चयनित छात्राएं आफरीन, साक्षी, गुंजन, कनिष्का, मोनिका, सृष्टि और प्रगति अपने माता-पिता के साथ बेंगलुरु निशुल्क पाठ्यक्रम करने के लिए रवाना हुईं। उनकी रवानगी के दौरान बबिता मेहरोत्रा और कपिल कुमार, परिवर्तन द चेंज संस्था का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर सभी छात्राओं को उपहार देकर शुभकामनाओं के साथ उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बेंगलुरु के लिए विदा किया गया।

यह पहल ग्रामीण बेटियों को शिक्षा और रोजगार के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।