बारिश से पहले रेलवे की बड़ी तैयारी, 7 घंटे में पटरी के नीचे लगाया 65 टन का विशाल ढांचा

बारिश से पहले रेलवे की बड़ी तैयारी, 7 घंटे में पटरी के नीचे लगाया 65 टन का विशाल ढांचा

ओसियां-तिवरी रेलखंड पर जल निकासी पुल निर्माण पूरा, बरसात में सुरक्षित रहेगा रेल संचालन

जोधपुर। बरसात के मौसम में रेलवे पटरी को जलभराव और मिट्टी कटाव से सुरक्षित रखने के लिए बड़ी तकनीकी तैयारी पूरी कर ली है। जोधपुर मंडल के ओसियां-तिवरी रेलखंड पर विशेष अवरोध लेकर रेलवे लाइन के नीचे 65 टन वजनी विशाल ढांचा स्थापित किया गया है। इस कार्य के पूरा होने से बारिश के दौरान पानी की निकासी बेहतर होगी और पटरी को नुकसान पहुंचने की आशंका काफी कम हो जाएगी।

अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि मंडल के राईका बाग-जैसलमेर रेलखंड पर फाटक संख्या 42 के पास 13 और 14 जून की रात सात घंटे का विशेष अवरोध लिया गया। इसी दौरान रेलवे पटरी के नीचे जल निकासी संरचना स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होने से पहले यह कार्य पूरा करना बेहद जरूरी था ताकि तेज बारिश के दौरान रेल संचालन प्रभावित न हो।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार पटरी के नीचे लगाया गया यह ढांचा 7.85 मीटर लंबा है, जबकि इसका आकार ढाई मीटर गुणा डेढ़ मीटर है। इसे आधुनिक काटो और ढको पद्धति से स्थापित किया गया। इस पद्धति की खासियत यह है कि पटरी को पूरी तरह हटाए बिना उसके नीचे जल निकासी की मजबूत संरचना तैयार की जाती है, जिससे रेल संचालन पर बहुत कम असर पड़ता है।

विक्रम सिंह बड़गुजर ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पटरी को नियंत्रित तरीके से ऊपर उठाया गया और सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया। संरचना को अधिक मजबूत बनाने के लिए विशेष भराव सामग्री का उपयोग किया गया, जबकि कार्यस्थल पर गिट्टी सहित सभी जरूरी संसाधन पहले से उपलब्ध रखे गए थे।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए 225 टन और 300 टन क्षमता वाली दो भारी क्रेन, दो खुदाई मशीनें, अभियंताओं, पर्यवेक्षकों और बड़ी संख्या में श्रमिकों की टीम लगातार काम में जुटी रही।

इस कार्य से होंगे बड़े फायदे

बारिश का पानी तेजी से निकलेगा और जलभराव की संभावना कम होगी।

पटरी के नीचे मिट्टी कटाव और टूट-फूट जैसी स्थिति से बचाव होगा।

बरसात के दौरान रेल संचालन अधिक सुरक्षित, सुचारु और बिना रुकावट जारी रहेगा।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह नई संरचना भविष्य में भारी बारिश के दौरान रेलवे पटरी की मजबूती बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी और यात्रियों को सुरक्षित तथा भरोसेमंद रेल सेवा उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी।