12 वर्षों में पूर्वोत्तर में रेल विकास की नई तस्वीर, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने कनेक्टिविटी को दी नई पहचान

मालीगांव। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत में विकास की नई इबारत लिखते हुए रेल कनेक्टिविटी, आधारभूत संरचना, बिजलीकरण और यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। इन वर्षों में रेलवे ने न केवल पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ा है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति दी है।

रेलवे के बजट में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2009 से 2014 के दौरान जहां औसत बजट आवंटन 2,122 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 11,486 करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह करीब पांच गुना वृद्धि है, जिसने पूरे क्षेत्र में रेल विकास कार्यों को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवधि की सबसे बड़ी उपलब्धियों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में मीटर गेज लाइनों को पूरी तरह ब्रॉड गेज में परिवर्तित करना शामिल है। इसके साथ ही रेलवे का बिजलीकरण, जो 2014 से पहले लगभग नहीं के बराबर था, अब नेटवर्क के 95 प्रतिशत से अधिक हिस्से तक पहुंच चुका है। 4,170 रूट किलोमीटर से अधिक रेल मार्ग का विद्युतीकरण होने से ट्रेन संचालन पहले से अधिक तेज, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और कुशल हुआ है।

रेलवे ने 2,000 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनें बिछाई हैं, जिनमें नई लाइन और दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम की राजधानियों तक रेल संपर्क पहुंच चुका है, जबकि सिक्किम, नागालैंड और मणिपुर में कई रणनीतिक परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कई स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। इसके अलावा वंदे भारत, अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेन सेवाओं की शुरुआत, स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्केलेटर, डिजिटल टिकटिंग और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं ने यात्रा अनुभव को काफी बेहतर बनाया है।

गुवाहाटी में सराईघाट पुल के साथ नया रेल-सह-सड़क पुल बनाया जा रहा है। वहीं कोकराझार के बासबारी में वैगन पीरियॉडिक ओवरहॉलिंग कारखाने का निर्माण जारी है। इसके साथ ही भूटान के साथ बनारहाट-समत्से और कोकराझार-गेलेफू रेल लिंक के जरिए अंतरराष्ट्रीय रेल संपर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, जिससे सीमा पार व्यापार और आर्थिक विकास को नया बल मिलेगा।

संरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी रेलवे ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। 500 से अधिक रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाए गए हैं। हाथियों की सुरक्षा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली शुरू की गई है, वहीं दुर्लभ हुलॉक गिब्बन प्रजाति के संरक्षण के लिए विशेष कैनोपी ब्रिज लगाए गए हैं।

लगातार जारी बड़ी परियोजनाओं और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे आज एक आधुनिक, समृद्ध और बेहतर कनेक्टिविटी वाले पूर्वोत्तर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है। रेलवे की यह प्रगति आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के विकास की मजबूत नींव साबित होगी।