सिविल डिफेंस ने किया जन-जागरूकता कार्यक्रम: अग्नि सुरक्षा, सीपीआर और युद्धकालीन रक्षा के दिए टिप्स

माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, आम नागरिकों को किसी भी आपातकालीन स्थिति में पहले रिस्पॉन्डर (First Responder) के रूप में सक्षम बनाने के उद्देश्य से नागरिक सुरक्षा कोर (सिविल डिफेंस), सिविल लाइंस डिवीजन की ?क़हरवान पोस्ट? द्वारा एक वृहद जन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्थानीय रस्तोगी सभा भवन, सौदागरान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों, महिलाओं और समाजसेवियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

युद्धकालीन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन
कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक और सिविल डिफेंस के सहायक उप नियंत्रक, श्री प्रमोद कुमार डागर ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिक सुरक्षा का मूल मंत्र 'जागरूकता ही बचाव है' है। उन्होंने विस्तार से बताया कि युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों या प्राकृतिक आपदाओं के समय नागरिक कैसे अपनी जान बचा सकते हैं और दूसरों के लिए ढाल बन सकते हैं। उन्होंने 'ब्लैकआउट' के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, सुरक्षित स्थानों की पहचान करने और अफवाहों से बचने के तरीकों पर प्रकाश डाला।

सीपीआर (CPR): जीवन बचाने की कला
प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ?सीपीआर? (CPR - Cardiopulmonary Resuscitation) तकनीक का लाइव डेमो था। श्री डागर ने स्पष्ट किया कि जब किसी व्यक्ति का हृदय अचानक काम करना बंद कर दे (Cardiac Arrest), तो अस्पताल पहुंचने से पहले के कुछ मिनट बेहद निर्णायक होते हैं।

? विधि का प्रदर्शन: उन्होंने 'मैनकिन' (Manikin) पुतले पर सीपीआर की सही प्रक्रिया करके दिखाई। उन्होंने समझाया कि किस तरह छाती पर सही दबाव (Chest Compressions) देकर और कृत्रिम श्वसन देकर मस्तिष्क तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है।
? महत्व: उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि सही समय पर सीपीआर शुरू कर दिया जाए, तो मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उपस्थित लोगों को व्यावहारिक रूप से यह सिखाया गया कि छाती के केंद्र में कितनी गहराई तक और किस गति (100 से 120 कंप्रेशन प्रति मिनट) से दबाव डालना चाहिए।
? हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग: उपस्थित लोगों, विशेषकर युवाओं और गृहिणियों से इस प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया, ताकि वे घबराहट में भी सही तरीके से प्राथमिक उपचार दे सकें।

अग्नि सुरक्षा और एलपीजी सिलेंडर का लाइव डेमो
कार्यक्रम में आग से सुरक्षा पर विस्तृत तकनीकी चर्चा हुई। श्री डागर ने आग के विभिन्न वर्गों (Class A, B, C, D) के बारे में बताया और समझाया कि हर तरह की आग को पानी से नहीं बुझाया जा सकता। रसोई गैस (LPG) सिलेंडर में आग लगने पर उसे नियंत्रित करने का लाइव प्रदर्शन कार्यक्रम का केंद्र बिंदु रहा। उन्होंने बताया कि सिलेंडर में आग लगने पर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सूझबूझ से गीले जूट के बोरे या कपड़े का उपयोग करके उसे कैसे ढका जाए ताकि ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सिलेंडर के फटने का डर अक्सर अफवाह होता है, यदि उसे सही तकनीक से बुझाया जाए।

कार्यक्रम में रिषभ रस्तोगी ने समाज के प्रबुद्ध वर्ग का आह्वान करते हुए कहा कि, "सिविल डिफेंस का स्वयंसेवक बनना देश सेवा का एक मौन माध्यम है।" उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन से थोड़ा समय निकालें और इस संस्था से जुड़ें, ताकि शहर के हर मोहल्ले में प्रशिक्षित स्वयंसेवक मौजूद हों। उन्होंने कहा कि एक जागरूक नागरिक ही एक सुरक्षित समाज की आधारशिला है।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में नागरिक सुरक्षा के विभिन्न पदाधिकारियों की सराहनीय भूमिका रही। इस अवसर पर दिनेश यादव, अनिल शर्मा, विशाल रस्तोगी, सरदार कवलजीत सिंह, राजीव रस्तोगी, आकाश बाबू, चंदन, अमन, आदित्य, आमिर और अरविंद सहित बड़ी संख्या में वार्डन्स सक्रिय रहे।
रस्तोगी सभा भवन के पदाधिकारियों ने नागरिक सुरक्षा कोर की इस मुहिम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

रस्तोगी सभा के गोपाल रस्तोगी, नितेश रस्तोगी ने समापन संबोधन में सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग जीवनरक्षक तकनीकों में पारंगत हो सकें।