ब्लॉक प्रमुख के द्वारा मंगरौर में मनरेगा कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, मस्टररोल और जमीनी हकीकत में अंतर का आरोप ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग

ब्लॉक प्रमुख के द्वारा मंगरौर में मनरेगा कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, मस्टररोल और जमीनी हकीकत में अंतर का आरोप

ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग

शहाबगंज (चंदौली)। शहाबगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत मंगरौर में मनरेगा के तहत संचालित कार्यों को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई कार्यों में कागजों पर बड़ी संख्या में मजदूर दर्शाए जा रहे हैं, जबकि मौके पर वास्तविक संख्या काफी कम दिखाई देती है। आरोपों के बाद क्षेत्र में मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

140 से अधिक मजदूर दर्ज, मौके पर दिखाई दिए गिने-चुने श्रमिक

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ कार्यस्थलों पर मस्टर रोल में 140 से अधिक श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई है, लेकिन मौके पर सीमित संख्या में ही मजदूर कार्य करते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अंतर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
हालांकि इन आरोपों की अभी किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

एक ही कार्य को अलग-अलग नाम से स्वीकृत कराने का आरोप

क्षेत्र के कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि एक ही प्रकार के कार्य को अलग-अलग नामों से प्रस्तुत कर स्वीकृत कराया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि यह आरोप सही है तो इससे सरकारी धन के उपयोग और कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले वर्षों में स्वीकृत कार्यों का तकनीकी परीक्षण और अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए।

मस्टर रोल और फोटो अपलोड प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा कार्यों में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि कार्यस्थलों से अपलोड की गई तस्वीरों और वास्तविक मजदूरों की पहचान का सत्यापन किया जाए।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

क्षेत्र पंचायत कार्यों को लेकर बढ़ी चर्चा

मंगरौर ग्राम पंचायत में क्षेत्र पंचायत निधि और मनरेगा के समन्वय से संचालित कार्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी कार्यों की गुणवत्ता, लागत और श्रमिक उपस्थिति की जांच कराई जानी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सोशल ऑडिट की मांग हुई तेज

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मंगरौर ग्राम पंचायत में हुए मनरेगा कार्यों का विशेष सोशल ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मनरेगा योजना का उद्देश्य और जमीनी चुनौती

मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में विकास कार्यों को बढ़ावा देना है। लेकिन यदि कहीं अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंच सके।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

मंगरौर ग्राम पंचायत के सभी मनरेगा कार्यों की उच्चस्तरीय जांच।
मस्टर रोल और वास्तविक श्रमिकों का भौतिक सत्यापन।
कार्यस्थलों का संयुक्त निरीक्षण।
डिजिटल उपस्थिति और फोटो रिकॉर्ड की जांच।
सोशल ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

मंगरौर ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर उठे सवालों के बीच अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से न केवल वास्तविक स्थिति सामने आएगी, बल्कि सरकारी योजनाओं में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।