बेबसी की दर्दनाक तस्वीर,चार वर्षों से बिस्तर पर परिवार का मुखिया

ऊंचाहार,रायबरेली।तहसील क्षेत्र के शहजादपुर ग्राम पंचायत के बांधा बैरी गांव से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई है,जो सरकारी योजनाओं और सामाजिक संवेदनाओं पर कई सवाल खड़े करती है।यहां के निवासी सुशील कुमार पासी पिछले चार वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।कभी परिवार का सहारा रहे सुशील आज खुद दूसरों के सहारे जीवन जीने को मजबूर हैं।सुशील कुमार पासी ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले उन्हें टीबी की बीमारी हुई थी।इलाज के बाद टीबी तो ठीक हो गई,लेकिन इसके बाद उनके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया।तब से वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं और बिस्तर पर ही अपना जीवन बिताने को मजबूर हैं।परिवार की हालत इतनी खराब है कि घर में कमाने वाला कोई नहीं है।सुशील की पत्नी ही मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पेट पाल रही हैं।परिवार में तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं,जिनकी पढ़ाई-लिखाई और भविष्य को लेकर परिजन बेहद चिंतित हैं।महंगाई के इस दौर में एक अकेली महिला के लिए पूरे परिवार का खर्च उठाना किसी चुनौती से कम नहीं है।बच्चों के पास न पर्याप्त कपड़े हैं और न ही शिक्षा के लिए जरूरी संसाधन है।परिवार आर्थिक तंगी और लाचारी के बीच जीवन यापन कर रहा है। ऐसे में इस गरीब और बेबस परिवार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है,ताकि उनके परिवार को सहारा मिल सके और बच्चों का भविष्य संवर सके।अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस परिवार की मदद के लिए आगे आते हैं या नहीं।एक तरफ सरकार गरीबों के कल्याण और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है,वहीं दूसरी तरफ सुशील कुमार पासी जैसे परिवार आज भी मदद और सहारे की आस लगाए बैठे हैं।यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं,बल्कि उन तमाम जरूरतमंद लोगों की है जो आज भी किसी मसीहा के इंतजार में है।