छःवर्षों से पीड़िता परेशान,नहीं रेंगा प्रशासन के कानों में जूं

रायबरेली।प्रशासन की उदासीनता कहा जाए या फिर कुछ और,फरियादियों की समस्याओं को सुनने और उनके निवारण के तहसील और थाने में समाधान दिवस का आयोजन किया जाता है ताकि फरियादियों को उनकी समस्या के अनुरूप तत्काल निराकरण किया जाए।लेकिन हस्ताक्षर और संबंधित अधिकारियों को सिर्फ निर्देश और टीमें गठित तक ही सीमित रह जाती है।फरियादियों को न्याय मिलना तो दूर की बात है।एक ऐसा ही मामला जनपद के सलोन अंतर्गत डीह थाने का है।जहां पीड़िता साधना पुत्री सुदामा गोपाल पुर निवासी लगभग पिछले छः वर्षों में कई बार जनपद मुख्यालय पर धरने पर बैठी संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दिया,जनपद के अधिकारियों की चौखट पर गिड़गिड़ाई,प्रदेश के मुख्य मंत्री को भी शिकायती पत्र भेजकर,शासन द्वारा जारी नंबरों पर शिकायत कर न्याय की माँग कि किंतु आज तक क्रास चेकिंग कर सही,गलत का निर्णय नहीं हो पाया,न ही पीड़िता को न्याय मिला।सोचने वाली बात है कि जिस प्रशासन के खौफ से लोगों की नींद हराम हो जाती उसी प्रशासन को सरहंग और दबंग किस्म के लोग ठेंगा दिखाते है।गौरतलब हो कि पीड़िता के खेतों को जाने वाला चकमार्ग राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज है।वही गाँव के ही शत्रोहन,रामसुख, परमसुख पुत्र गण स्वर्गीय लल्लू अवैध तरीके से चकमार्ग में कब्जा किए हुए है,जिससे पीड़िता अपने खेतों में संसाधन लेकर जुताई बुवाई करने में असक्षम है।जिससे पीड़िता की खेती पिछले छः वर्षों खाली पड़ी है।जबकि पीड़िता तीन बहने है और मातापिता दोनों का गंभीर बीमारियों इलाज चल रहा है।शासन बहन बेटियों और महिलाओं को न्याय दिलाने के तरह तरह के नियम कानून लाती है,उसके बावजूद भी पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा है।पीड़िता का परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंचने वाला है,किसान क्रेडिट से पीड़िता ने राशि भी निकाला है,उसे भरने के लिए बैंक से दबाव भी है।शासन और प्रशासन को अब किस बात का इंतजार है।