* " अन्नदान यानि प्राणदान " - स्वामी राजेश्वरानंद *

दिल्ली 28 मई:~*"किसी भूखे को भोजन मात्र दान ही नहीं बल्कि प्राणदान है यह संदेश दिया गया स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज द्वारा गोरख पार्क शाहदरा स्थित श्री राजमाता झंडेवाला मंदिर में विगत छह साल से चल रहे श्री राजमाता जी अन्नक्षेत्र का सातवें वर्ष में प्रवेश करते हुए आयोजन में भक्तों को।

सदगुरू राजदरबार के प्रबंधक राम वोहरा ने बताया कि स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज के सान्निध्य में कोरोना कॉल से चल रहे श्री राजमाता जी अन्नक्षेत्र यानी भंडारा वितरण सातवें वर्ष में प्रवेश कर गया। पिछले सात साल से बिना एक अवकाश के भी कड़कड़ाती सर्दी, भीषण गर्मी हो या मूसलाधार बारिश लेकिन साधु संतों, अभावग्रस्त या आमजनों के लिए भंडारा वितरण जारी रहा । दिल्ली में बाढ़ की स्थिति में श्री राजमाता जी अन्नक्षेत्र द्वारा पीड़ित लोगों को भोजन के साथ पानी का पानी उपलब्ध कराया गया। दिवाली होली आदि त्योहारों पर विशेष रूप से मिष्ठान वितरित किया गया तो भीषण गर्मी के पूरे मौसम में ठंडा मीठा शरबत, ग्लूकोस, सत्तू जल सेवा का प्रबंध हर वर्ष किया जाता रहा है।इसी अन्नदान महादान संदर्भ में अभावग्रस्त महिलाओं को राशन वितरण प्रसाद रूप किया जाता है।आज सातवें वर्ष में प्रवेश कार्यक्रम में गुरु माता जी के साथ प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य विदुषी ओजस्वी तेजस्वी साध्वी कृष्णानंद जी द्वारा भंडारा वितरण किया गया।स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज द्वारा साध्वी कृष्णानंद जी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया एवं उन्हें भी अपने क्षेत्र में भंडारा वितरण के लिए प्रोत्साहित किया गया।

इस अवसर पर स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने भक्तों को कहा कि *"अन्नदान कोई साधारण दान नहीं बल्कि महादान से बढ़कर सीधे प्राणदान ही मानना चाहिए।ऐसे शुभकार्यों के लिए सबसे अधिक आवश्यकता है तो संकल्प शक्ति की।लोगो को प्रोत्साहित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि यह भंडारा हमने 2 फुल्के दान में लेने से शुरू किया था आज यह वटवृक्ष का रूप ले चुका हैं जिसकी छत्रछाया में सैकड़ों लोग भोजन प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।स्वामी जी ने कहा कि उस समय हमें बहुत प्रसन्नता होती हैं जब अनेक भंडारा वितरण करने वाले लोग जब कहते है कि आप से प्रेरणा लेकर हमने यह अन्नदान मुहिम शुरू की थी।हर परिवार को चाहिए कि वह अपने रसोई से प्रतिदिन दो फुल्के दान अवश्य करें।ओर जब आप कोई भी व्रत उपवास करे तो उस दिन आपके द्वारा त्याग किए गए अन्न को किसी जरूरतमंद या किसी भंडारे में सहयोग रूप में दान करें। आपके द्वारा दिया गया तुच्छ लेकिन कुछ अन्न किसी के जीवन रक्षा का कार्य करता हैं।

राम वोहरा 9212315006