श्रीगंगानगर,। राजस्थान ..."> श्रीगंगानगर,। राजस्थान ..."> श्रीगंगानगर,। राजस्थान ...">

नाली निर्माण से पहले लोगों की परेशानियों का समाधान करे यूआईटी - राजपाल

श्रीगंगानगर,। राजस्थान पंजाबी महासभा की श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिला इकाइयों के अध्यक्ष वीरेंद्र राजपाल ने गौशाला रोड से पदमपुर मार्ग की ओर जाने वाले राधेश्याम कोठी मार्ग पर यूआईटी द्वारा प्रस्तावित नाली निर्माण कार्य पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बिना लोगों की व्यावहारिक समस्याओं को समझे और उनका समाधान किए सीधे 2-2 मीटर पीछे नाली बनाने का यूआईटी ने टेंडर जारी कर दिया।इससे स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

आज अपने निवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में वीरेंद्र राजपाल ने विस्तार से समस्याएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि यह शहर के ब्लॉक एरिया का मुख्य मार्ग है, जो रात-दिन अत्यधिक व्यस्त रहता है। इस सड़क पर बिजली और टेलीफोन के खंभे, अंडरग्राउंड वॉटर पाइपलाइन, सीवरेज लाइन, मोबाइल कंपनियों की केबलिंग और सीसी रोड पहले से मौजूद हैं। इसके अलावा पुलिस कमांड सेंटर के सीसीटीवी के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग का काम भी बाकी है। इलाके में सेम की समस्या इतनी गंभीर है कि मात्र 4-5 फीट खुदाई पर पानी निकल आता है।

उन्होंने बताया कि मार्ग के दोनों तरफ आवासीय मकानों के सेफ्टी टैंक और पानी के भूमिगत टैंक चबूतरों व चारदीवारियों में बने हुए हैं। 2 मीटर पीछे नाली बनाने से इन टैंकों का क्या होगा? इन्हें घर के अंदर शिफ्ट करना संभव नहीं है। यूआईटी को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

खंभों को 2 मीटर पीछे करने से वे घरों के बहुत नजदीक आ जाएंगे, जिससे छत पर खड़े होने वाले लोगों को बिजली का करंट लगने का खतरा बढ़ जाएगा। राजपाल ने समाधान सुझाया कि खंभे पीछे करने की बजाय पूरे मार्ग पर विद्युत लाइन को अंडरग्राउंड कर दिया जाए, लेकिन सेम की समस्या को देखते हुए यह भी चुनौतीपूर्ण होगा। इसी तरह अधिकांश मकानों और दुकानों में छज्जे बने हुए हैं। 2 मीटर पीछे नाली बनने से बड़े वाहनों का आवागमन मुश्किल हो जाएगा।

वीरेंद्र राजपाल ने बताया कि आजादी से पहले बीकानेर रियासत काल में इस रोड पर दोनों तरफ 6-6 फुट जगह छोड़कर बिजली खंभे लगाए गए थे। नगर परिषद ने लोगों को इसी जगह पर सेफ्टी टैंक बनाने की अनुमति दी और अनुदान भी दिया। नक्शे पास कर भवन बने हैं। मौजूदा मास्टर प्लान में रोड 50 फुट चौड़ी है, जबकि यूआईटी के टेंडर में भवनों की दीवार से मात्र 18 इंच छोड़कर नाली बनाने की बात है। इससे रियासत काल की 6-6 फुट वाली जगह और टैंकों का क्या होगा? भूमिगत पानी की पाइपलाइन, मोबाइल कंपनियों की केबलिंग और सीवरेज लाइन पहले से बिछी हुई है। इस मार्ग पर लगभग 10 फुट गहरा नाला (गटर) भी बना हुआ है। इसकी सफाई व्यवस्था कैसे हो पाएगी यह भी यूआईटी को अथवा नगर परिषद को बताना चाहिए।

इन सबको देखते हुए नाली निर्माण इतना सरल नहीं है।

श्री राजपाल ने हैरानी व्यक्ति की कि लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे इस मार्ग के दोनों तरफ नाली निर्माण के लिए मात्र 41 लाख रुपये का टेंडर निकाला गया है। इतनी कम राशि में गुणवत्तापूर्ण काम संभव नहीं है। बिजली खंभों को शिफ्ट करने का खर्च कौन वहन करेगा, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया।

वीरेंद्र राजपाल ने जोर देकर कहा कि वे मास्टर प्लान के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पहले पूर्ण लेआउट प्लान, सभी विभागों-बिजली, पानी, सीवरेज, टेलीकॉम आदि के साथ समन्वय और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए। सर्वे के बाद ही निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए। तब लोग पूर्ण सहयोग करेंगे और अतिक्रमण स्वयं हटा लेंगे।

उन्होंने बतायाकी राजस्थान पंजाबी महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही जिला कलेक्टर से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देगा। प्रेस वार्ता में अरोडवंश सनातन धर्म मंदिर (ट्रस्ट) के मुख्य संरक्षक ज्ञान नागपाल, राधेश्याम कोठी मार्ग निवासी दीपक भाटिया,ज्योति लाकडी आदि स्थानीय दुकानदार और रहवासी उपस्थित रहे।