बीमा कंपनियों की मनमानी पर स्थायी लोक अदालत सख्त, ब्याज समेत भुगतान देने का आदेश

वाराणसी। जिले के स्थायी लोक अदालत ने बीमा क्लेम से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनियों को उपभोक्ताओं का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया है। लोक अदालत के अध्यक्ष अक्षय लाल गुप्ता और श्रीप्रकाश मिश्रा के इस फैसले से लंबे समय से बीमा क्लेम के लिए परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली है।

पहले मामले में डॉ. मनोज कुमार सिंह ने अपने पिता राज राजेश्वरी प्रसाद सिंह का 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से कराया था। बीमा अवधि के दौरान उनके पिता का इलाज वाराणसी के हेरिटेज हॉस्पिटल में कराया गया, जिसमें कुल 3,30,266 रुपये खर्च हुए। आरोप है कि इलाज के बाद भी बीमा कंपनी ने क्लेम राशि का भुगतान नहीं किया।

इसके बाद डॉ. मनोज कुमार सिंह ने स्थायी लोक अदालत में परिवाद दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 15 मई 2026 को निर्णय सुनाते हुए बीमा कंपनी को 3,30,266 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही तय समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश भी दिए। अदालत ने वाद व्यय के रूप में 20 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश भी पारित किया।

दूसरे मामले में वाराणसी की एक महिला ने बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। महिला का आरोप था कि वाहन दुर्घटना के बावजूद बीमा कंपनी ने उनका क्लेम निरस्त कर दिया, जबकि वाहन बीमित था।

मामले की सुनवाई के बाद स्थायी लोक अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को करीब 2,64,031 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान न करने पर ब्याज देने के निर्देश भी जारी किए गए।

स्थायी लोक अदालत के इन फैसलों को उपभोक्ता हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियां नियमों के विपरीत उपभोक्ताओं के वैध दावों को लंबित नहीं रख सकतीं।