जम्मू मंडल के रेलवे इंजीनियरों का जादू: पुल 17 बोला “मैं फिर से खड़ा हूं!”

जम्मू मंडल ने दिखाई इंजीनियरिंग दक्षता, रावी नदी पर क्षतिग्रस्त पुल संख्या-17 रिकॉर्ड समय में बहाल

सीनियर डीईएन शुभम पवार के नेतृत्व में सफल हुआ चुनौतीपूर्ण कार्य, रेल परिचालन को मिली नई मजबूती

जम्मू। उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने उत्कृष्ट इंजीनियरिंग क्षमता और मजबूत कार्यप्रणाली का परिचय देते हुए रावी नदी पर स्थित महत्वपूर्ण रेलवे पुल संख्या-17 को रिकॉर्ड समय में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित कर लिया है। यह पुल कठुआ (जम्मू-कश्मीर) और माधोपुर (पंजाब) सेक्शन के बीच स्थित है, जो इस क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

वर्ष 2025 में आई भीषण बाढ़ और भारी बारिश के दौरान इस पुल को गंभीर क्षति पहुंची थी। पुल में 45 मीटर स्पैन वाले नॉन-स्टैंडर्ड गर्डर डिजाइन के कारण इसकी बहाली को अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस कार्य को पूरा करने में लगभग दो वर्ष का समय लग सकता था, लेकिन जम्मू मंडल के इंजीनियरिंग विभाग ने नई तकनीक, सटीक योजना और सतत प्रयासों के माध्यम से इसे मात्र आठ महीनों में ही पूरा कर एक नई मिसाल कायम कर दी।

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडे ने बताया कि पुल संख्या-17 की सफल बहाली के साथ जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए सभी पांच प्रमुख रेलवे पुल अब पूरी तरह बहाल हो चुके हैं। इससे उत्तर रेलवे में ट्रेनों के संचालन की दक्षता, समयबद्धता और सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा।

इस उल्लेखनीय उपलब्धि में जम्मू मंडल के इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर डीईएन शुभम पवार की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में इंजीनियरों एवं तकनीकी कर्मचारियों की टीम ने कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर कार्य कर समय से पहले परियोजना को सफल बनाया। सीनियर डीईएन शुभम पवार ने कहा कि यह सफलता पूरी टीम की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करते हुए आधुनिक संसाधनों एवं नवीन तकनीकी समाधानों का उपयोग किया गया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार पुल संख्या-17 के पुनर्स्थापन से जम्मू मंडल में रेल यातायात को नई गति मिलेगी। यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी, वहीं माल परिवहन में भी तेजी आएगी जिससे क्षेत्र के व्यापार और आर्थिक विकास को लाभ पहुंचेगा।

उत्तर रेलवे ने दोहराया कि यात्रियों को सुरक्षित, कुशल और विश्वसनीय रेल सेवाएं प्रदान करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए इसी प्रकार के विकास कार्य निरंतर जारी रहेंगे।

यह जानकारी उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय द्वारा दी गई।