* श्रीराजमता मंदिर में सात जोड़ों का सामूहिक विवाह - राजेश्वरानंद *

दिल्ली 7 मई:~"आगे चार साल में जो चार संतान पैदा करेंगे उन्हें एक लाख पुरस्कार"यह आश्चर्यजनक संदेश दिया स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने गोरख पार्क शाहदरा स्थित श्री राजमाता झंडेवाला मंदिर में सामूहिक विवाह महोत्सव में आए हुए लोगों को।

सदगुरू राजदरबार के प्रबंधक राम वोहरा ने बताया कि स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज द्वारा "कन्यादान महादान"के रूप में लगातार अभावग्रस्त परिवारों की कन्याओं का विवाह किए जाते रहते हैं इसी कड़ी में सात अभावग्रस्त परिवारों की कन्याओं का सनातन संस्कृति द्वारा वैदिक मंत्रोचारण द्वारा विवाह संपन्न किया गया।जिसने एक विधवा एवं तलाकशुदा जोड़े को पुनर्स्थापित मार्ग पर जीवनयापन का आशीर्वाद दिया गया।विवाह लाभार्थी दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश,हरियाणा से आए।मंदिर की महिला सेवादारों ने मंदिर के मुख्य द्वार पर दुल्हों के मस्तक पर तिलक लगाते हुए आरती उतारकर स्वागत किया गया।गणमान्य लोगों की उपस्थिति के साथ करतल ध्वनि के बीच सभी वर वधुओं ने एक दूसरे को जयमाला पहनाकर स्वीकार किया।विद्वान पंडित श्री राम शर्मा द्वारा वैदिक मंत्रोचारण के साथ फेरे,सप्तपदी संपन्न कराई गई।नवदंपतियों को विदाई के समय उपहार स्वरूप पलंग,अलमारी,कपड़े,बर्तन, गैस चूल्हा, आभूषण एवम दैनिक उपयोग का घरेलू सामान दिया गया।इस अवसर पर कन्यादान में विशेष रूप से गुरु माता पूजा जी, पूर्व सांसद एवं दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जय प्रकाश अग्रवाल,नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड चीफ विजिलेंस कमिश्नर अमित शर्माजी,एडिशनल पुलिस उपायुक्त संदीप लांबा,पार्षद प्रियंका सक्सेना,रितेश सूजी,अनिल वशिष्ठ, ईश्वर बागड़ी,अविता चौधरी, कुसुम तोमर ने पहुंचकर कन्यादान में भाग लिया।

स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि "सनातन संस्कृति में विवाह का प्रथम उद्देश्य सृष्टि का विस्तार होता हैं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हमारा शिक्षित युवा संतान उत्पत्ति को नजरअंदाज कर रहा है जोकि समाज के प्रति कर्तव्यविमूढ़ता ही नहीं बल्कि पाप है।अगले चार साल में चार बच्चों की उत्पत्ति का माध्यम बनिए और इनमें से एक बच्चा धर्म समाज के लिए समर्पित करें। स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने नवदम्पतियों को संतान उत्पत्ति के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि " जो दंपत्ति अगले चार साल में चार संतान की उत्पत्ति करता हैं उसे संस्थान की ओर से एक लाख रुपया पुरस्कार दिया जाएगा और साथ में एक बच्चे की पढ़ाई का सारा खर्चा संस्थान की ओर से किया जाएगा। स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने आगे कहा कि किसी अभावग्रस्त परिवार की कन्या के विवाह में सहयोग देना मां भगवती के शतचंडी यज्ञ से बढ़कर शुभफलदाई सिद्ध होता हैं। ऐसे परिवार की कन्या विवाह करने से पहला फायदा यह कि एक चिंताग्रस्त पिता की चिंता का हरण किया दूसरे सृष्टि विस्तार रूपी कार्य में सहयोग दिया और फिर इसके साथ अनेक उदास चेहरों पर मुस्कान लाने का आप माध्यम बन गए।कन्यादान करने से रक्तदान, जलदान,वस्त्रदान,अन्नदान आदि अनेक प्रकार के महत्वपूर्ण दान स्वयंमेव हो जाते है।

राम वोहरा 9212315006