मानसून से पहले अलर्ट मोड पर एनएफआर, सुरक्षित रेल संचालन के लिए व्यापक तैयारियां तेज

मालिगांव। मानसून के दौरान रेल सेवाओं के सुरक्षित और निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने अपनी तैयारियों को और मजबूत कर दिया है। भारी वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ जैसी संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

एनएफआर द्वारा बताया गया कि जोखिम वाले स्थानों पर पटरियों की निरंतर निगरानी के लिए स्थायी चौकीदारों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी खतरे की समय रहते पहचान कर तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना दी जा सके। भूस्खलन और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तटबंधों को मजबूत किया गया है, जल निकासी व्यवस्था सुधारी गई है तथा प्राकृतिक जल प्रवाह चैनलों की सफाई कर उन्हें दुरुस्त किया गया है।

रेलवे ने पहाड़ी क्षेत्रों सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर जल स्तर मापने वाले उपकरण भी लगाए हैं, जिससे बढ़ते जल स्तर की वास्तविक समय में निगरानी संभव हो सके।

आपात स्थिति के लिए त्वरित राहत व्यवस्था

आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एनएफआर ने प्रमुख स्थानों पर पत्थर, रेत की बोरियां और तार की जाली जैसी राहत सामग्री पहले से तैनात कर दी है। इसके साथ ही ?इमरजेंसी ऑन व्हील्स? ट्रेनें भी पूरी तरह तैयार रखी गई हैं, जिनमें तकनीकी कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

भूस्खलन, जलभराव और पटरियों के बह जाने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सभी डिवीजनों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्विक रिस्पॉन्स टीम) गठित किए गए हैं, जिन्हें परिचालन को शीघ्र बहाल करने हेतु प्रशिक्षित किया गया है।

डिवीजनों में पर्याप्त सामग्री का भंडारण

2026 मानसून तैयारियों के तहत सभी डिवीजनों में बड़ी मात्रा में सामग्री का रणनीतिक भंडारण किया गया है। लुमडिंग डिवीजन में 10,000 से 12,000 घन मीटर पत्थर, 2,000 से 3,000 घन मीटर रेत/खदान की धूल तथा 40,000 से अधिक सीमेंट की बोरियां उपलब्ध हैं। तिनसुकिया डिवीजन में 400 से 600 घन मीटर पत्थर, 100 से 150 घन मीटर रेत/खदान की धूल और 7,000 से अधिक सीमेंट की बोरियां संग्रहीत की गई हैं।

रंगिया डिवीजन में 6,000 से 8,000 घन मीटर पत्थर, 1,000 घन मीटर से अधिक रेत/खदान की धूल और 5,000 से अधिक सीमेंट की बोरियां रखी गई हैं। अलीपुरदुआर डिवीजन में 20,000 घन मीटर से अधिक शिलाखंड सहित अन्य सामग्री का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जबकि कटिहार डिवीजन में 3,000 से 5,000 घन मीटर शिलाखंड, 800 से 1,200 घन मीटर रेत/खदान की धूल तथा 20,000 से अधिक सीमेंट की बोरियां उपलब्ध हैं।

रेलवे ने बताया कि सभी डिवीजनों में विंच क्रैब, जैक, तिरफोर और ट्राइपॉड जैसी राहत उपकरण सामग्री भी तैयार रखी गई है, जिससे बचाव एवं राहत कार्य तेजी से किए जा सकें।

आईएमडी के साथ समन्वय, 24x7 नियंत्रण कक्ष सक्रिय

एनएफआर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के साथ लगातार संपर्क में है ताकि मौसम संबंधी अलर्ट और पूर्वानुमान वास्तविक समय में प्राप्त किए जा सकें। यह जानकारी 24 घंटे कार्यरत नियंत्रण कक्षों को ट्रेनों की आवाजाही और फील्ड स्टाफ की तैनाती को लेकर समय पर निर्णय लेने में मदद करती है।

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे आधिकारिक माध्यमों से यात्रा से संबंधित ताजा जानकारी प्राप्त करते रहें और रेलवे अधिकारियों के साथ सहयोग करें।

एनएफआर ने स्पष्ट किया है कि मानसून के दौरान यात्रियों की सुरक्षा, संचालन दक्षता और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रेलवे पूरी सतर्कता के साथ कार्य करेगा।

कपिनजल किशोर शर्मा मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, एनएफआर