संतृप्त विधानसभा बदलापुर: प्रीपेड स्मार्ट मीटर व विद्युत कटौती और स्थानीय विधायक रमेश चन्द्र मिश्र के आस्कर पालिटिक्स में पिस रही जनता

*बदलापुर की 'ऑस्कर' पॉलिटिक्स: जब मीटर मांगे बिजली, तो विधायक जी ने पेश की ठेकेदारों की 'बलि'!**

**बदलापुर (जौनपुर)।** जौनपुर के राजनीतिक मंच पर इन दिनों एक ऐसा नाटक चल रहा है, जिसके सामने बॉलीवुड की मसाला फिल्में भी फीकी पड़ जाएं। बदलापुर के भाजपा विधायक रमेश चन्द्र मिश्र ने 'जनता की समस्याओं' को निपटाने का जो **'पत्थरमार फॉर्मूला'** ईजाद किया है, वह राजनीति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। यह फॉर्मूला बड़ा सरल है: **"जब घर में मांगें खर्चा, तो पड़ोसी के यहाँ कर दो चर्चा (और दंगा)!"**

### **शातिर दिमाग की 'मास्टरक्लास'**

बदलापुर की हवाओं में उस चतुर व्यक्ति की कहानी तैर रही है, जिसने शादी के कपड़ों और शगुन के 'लाखों टके' बचाने के लिए पड़ोसी की छत पर ईंट चला दी थी। नतीजा? शादी छूट गई, पैसे बच गए और पूरा परिवार उस 'पत्थरबाज' को बचाने के लिए थाने के बाहर हाथ जोड़े खड़ा रहा।

विधायक रमेश चन्द्र मिश्र भी इसी **'पॉलिटिकल इंजिनीयरिंग'** के उस्ताद निकले। जनता प्रीपेड मीटर के करंट से झुलस रही थी, और विधायक जी ने अपनी 'जुबान के हीटर' से माहौल गरम कर दिया।

### **जनता दर्शन या 'कॉमेडी सर्कस'?**

अधिवक्ता मृदुल शर्मा ने जब प्रीपेड मीटर का मुद्दा सोशल मीडिया पर क्या उछाला, विधायक जी को लगा कि अब तो 'शादी' (असली काम) में जाना ही पड़ेगा। लेकिन माननीय तो ठहरे मंझे हुए कलाकार! उन्होंने 'जनता दरबार' सजाया। अधिकारियों की ऐसी 'परेड' बुलाई गई जैसे वो किसी खूंखार अपराधी के साथी हों।

**सीन कुछ ऐसा था:**

जनता उम्मीद लगाए बैठी थी कि अब मीटर उखड़ेंगे, बिल कम होगा। लेकिन तभी विधायक जी ने अपना असली 'पत्थर' फेंका! उन्होंने बिजली के मीटर को तो छुआ तक नहीं, बल्कि ठेकेदारों और अधिकारियों पर **'परमाणु बम'** की तरह फटना शुरू कर दिया।

**"विधायक जी की गर्जना ऐसी थी कि मानों ठेकेदारों को वहीं सूली पर टांग देंगे! जनता गदगद हो गई, तालियों की गड़गड़ाहट से आसमान गूँज उठा। लोग भूल गए कि वो बिजली का दुखड़ा सुनाने आए थे, उन्हें तो बस विधायक जी की 'सिंघम' वाली डांट में रस आने लगा।"**

### **मृदुल शर्मा की शिकायत और विधायक जी का 'डायवर्जन'**

अधिवक्ता मृदुल शर्मा सोचते रह गए होंगे कि उन्होंने मुद्दा **'बिजली के मीटर'** का उठाया था, लेकिन चर्चा **'ठेकेदारों के मीटर'** की होने लगी। विधायक जी ने बड़ी सफाई से उस शादी (प्रीपेड मीटर की समस्या) को टाल दिया और पूरे मामले को एक नए विवाद (अधिकारियों की डांट-फटकार) की ओर मोड़ दिया।

**परिणाम वही ढाक के तीन पात:**

* **मीटर:** वहीं लगा है और उतनी ही तेजी से भाग रहा है।

* **बिजली:** दर्शन दे दे तो उपकार है।

* **विधायक जी:** इलाके के हीरो बन गए क्योंकि उन्होंने 'अफसरों की क्लास' ले ली।

### *बदलापुर की जनता को 'अंगूठा छाप' समझा है क्या?**

विधायक जी का यह **'इवेंट मैनेजमेंट'** काबिले तारीफ है। यह विकास नहीं, बल्कि **'विकास का भ्रम'** पैदा करने की कला है। जब भी जनता हिसाब मांगेगी, विधायक जी किसी न किसी अधिकारी की बलि चढ़ा देंगे। जनता खुश हो जाएगी कि चलो, साहब ने साहब को डांटा! लेकिन साहब की जेब से जो प्रीपेड मीटर पैसा निकाल रहा है, उस पर विधायक जी का 'मौन व्रत' आज भी जारी है।

**यह बिल्कुल वैसा ही है:**

* **समस्या:** सर दर्द।

* **विधायक जी का इलाज:** पैर में कुल्हाड़ी मार दी ताकि आदमी सर दर्द भूलकर पैर पकड़ने लगे!

### **अंतिम प्रहार: सावधान! कहीं आप भी इस 'पत्थर' का शिकार तो नहीं?**

बदलापुर की जनता को समझना होगा कि अधिकारियों पर गरजना केवल एक **'एनेस्थीसिया' (बेहोशी का इंजेक्शन)** है, ताकि जब आपकी जेब काटी जाए, तो आपको दर्द न हो। विधायक रमेश चन्द्र मिश्र का यह 'पत्थरमार मॉडल' आने वाले दिनों में और भी निखरेगा।

अधिवक्ता मृदुल शर्मा जैसे लोग मुद्दा उठाएंगे और विधायक जी किसी और 'बलि के बकरे' (ठेकेदार) को ढूंढ लाएंगे। आखिर 'शादी' (जवाबदेही) से बचने का इससे सस्ता और टिकाऊ तरीका और क्या हो सकता है?

**बदलापुर वालों! तालियां बजाना जारी रखिये, क्योंकि आपके घरों में बिजली आए न आए, विधायक जी के कार्यालय में 'मनोरंजन' की आपूर्ति 24 घंटे बहाल है!**