मान्यता से बाहर पढ़ाई का खेल: 8वीं तक मान्यता, लेकिन 12वीं तक चल रही कक्षाएं, 4 स्कूलों पर कार्रवाई तय

मान्यता से बाहर पढ़ाई का खेल: 8वीं तक मान्यता, लेकिन 12वीं तक चल रही कक्षाएं, 4 स्कूलों पर कार्रवाई तय


चंदौली। जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहां कई निजी विद्यालय नियमों को ताक पर रखकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में यह बड़ा मामला उजागर हुआ।


निरीक्षण के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार ने विकास खंड सदर क्षेत्र के पांच विद्यालयों की जांच की। जांच में पाया गया कि जहां एक ओर आलोक इंटर कॉलेज अपने मानकों के अनुसार कक्षा 1 से 12 तक संचालित हो रहा है, वहीं चार अन्य विद्यालयों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं।


जिन विद्यालयों पर सवाल उठे हैं उनमें तपोवन विद्यालय, फोनिक्स स्कूल, इंडियन पब्लिक स्कूल और सूर्या जूनियर हाई स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों को केवल कक्षा 1 से 8 तक की मान्यता प्राप्त है, लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि यहां अवैध रूप से कक्षा 9 से 10 और यहां तक कि 12वीं तक की पढ़ाई कराई जा रही है।


सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों का नामांकन किसी अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में दर्ज था, जबकि वास्तविक पढ़ाई इन अवैध रूप से संचालित कक्षाओं में कराई जा रही थी। यह सीधे तौर पर शिक्षा नियमों का उल्लंघन और छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा रहा है।


निरीक्षण के दौरान विद्यालय प्रबंधन से जब इस संबंध में जवाब मांगा गया तो वे संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असफल रहे। इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित स्कूलों को तत्काल निर्देश दिया कि वे केवल उन्हीं कक्षाओं का संचालन करें जिनकी उन्हें आधिकारिक मान्यता प्राप्त है।


इसके साथ ही चारों विद्यालयों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में भी बिना मान्यता के कक्षाएं संचालित होती पाई गईं, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है कि कहीं उनके बच्चों का भविष्य इस तरह की लापरवाही की भेंट न चढ़ जाए।


प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले के अन्य विद्यालयों की भी जल्द ही व्यापक जांच कराई जाएगी, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।