पचफेड़िया में मनरेगा फर्जीवाड़े के नए खुलासे, फेस हाजिरी में भी गड़बड़ी के आरोप, एक ही चेहरा तीन बार, नाम अलग-अलग

पचफेड़िया में मनरेगा फर्जीवाड़े के नए खुलासे, फेस हाजिरी में भी गड़बड़ी के आरोप, एक ही चेहरा तीन बार, नाम अलग-अलग


चकिया, चंदौली। चकिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत पचफेड़िया में मनरेगा के तहत कथित फर्जीवाड़े का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। पहले जहां फर्जी मास्टररोल और कागजी कार्यों की शिकायतें सामने आई थीं, वहीं अब फेस हाजिरी प्रणाली में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।


एक ही चेहरा तीन बार, नाम अलग-अलग


ग्रामीणों के अनुसार, फेस हाजिरी में एक ही व्यक्ति का चेहरा कई बार अपलोड किया गया है। इतना ही नहीं, एक फोटो में पुरुष का चेहरा होने के बावजूद उसके सामने महिला का नाम दर्ज किया गया है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि फोटो और नामों में भारी हेराफेरी कर मनरेगा भुगतान निकाला जा रहा है।


फर्जी सॉफ्टवेयर से मास्टररोल भरने का आरोप


मामले में पहले से ही शिकायत दर्ज है कि फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए मस्टररोल तैयार किए जा रहे हैं और उसी आधार पर सरकारी धन की निकासी की जा रही है। अब फेस हाजिरी में सामने आई अनियमितताओं ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।


मजदूरों के नाम पर खेल, काम कोई और कर रहा


ग्रामीणों का आरोप है कि मस्टररोल में जिन मजदूरों के नाम दर्ज हैं, वे कार्यस्थल पर मौजूद नहीं होते। उनकी जगह अन्य लोगों से काम कराया जाता है, जबकि भुगतान दर्ज मजदूरों के नाम से किया जाता है।


बीडीओ और ग्राम प्रधान पर लगे आरोप


ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में ब्लॉक स्तर पर मिलीभगत है। विशेष रूप से बीडीओ विकास सिंह के सहयोग से ग्राम प्रधान द्वारा फर्जीवाड़ा किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।


जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं


सूत्रों के अनुसार, शिकायत के बाद संबंधित अधिकारी जांच के लिए गांव पहुंचे थे और उन्हें कई कमियां भी मिलीं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल


मनरेगा जैसी योजना में फेस हाजिरी प्रणाली को पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू किया गया था, लेकिन यदि इसी में गड़बड़ी होने लगे तो योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठना लाजिमी है।


कार्रवाई की मांग तेज


ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले ग्राम प्रधान, संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब मजदूरों के हक की रक्षा हो सके।

अब देखना यह होगा कि लगातार सामने आ रहे इन खुलासों के बाद प्रशासन कब ठोस कार्रवाई करता है या यह मामला भी जांच तक ही सीमित रह जाता है।