उत्तर मध्य रेलवे में मानव तस्करी के खिलाफ बड़ा अभियान, RPF और राष्ट्रीय महिला आयोग ने किया जागरूकता कार्यक्रम

उत्तर मध्य रेलवे में मानव तस्करी के खिलाफ बड़ा अभियान, RPF और राष्ट्रीय महिला आयोग ने किया जागरूकता कार्यक्रम

प्रयागराज में सेमिनार आयोजित, 230 से अधिक कर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

प्रयागराज। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से रेलवे सुरक्षा बल,उत्तर मध्य रेलवे और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के संयुक्त तत्वावधान में ?मानव तस्करी निरोधक? विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 31 मार्च को प्रयागराज के मुंडेरा स्थित होटल जसवंत विलास में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में राज्य एवं रेलवे प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रमुख अतिथियों में सुश्री बबीता चौहान (अध्यक्षा, राज्य महिला आयोग), डॉ. सरफराज अहमद खान (प्रोफेसर),अजीत सिंह (प्रतिनिधि, गुड़िया एनजीओ), मंडल रेल प्रबंधक प्रयागराज रजनीश अग्रवाल,प्रदीप कुमार गुप्ता (प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त, उत्तर मध्य रेलवे) सहित मुख्य सुरक्षा आयुक्त, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त और अन्य अधिकारी शामिल रहे।

सेमिनार में तस्करी की पहचान और रोकथाम पर चर्चा

सेमिनार के दौरान विशेषज्ञों ने मानव तस्करी की पहचान, रोकथाम के उपाय, पीड़ितों के बचाव और सहायता से जुड़े अहम बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि तस्कर अक्सर रेलवे जैसे परिवहन साधनों का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए स्टेशनों और ट्रेनों में संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना बेहद जरूरी है।

फ्रंटलाइन स्टाफ को किया गया जागरूक

कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए रेलवे से जुड़े उन सभी वर्गों को शामिल किया गया, जो यात्रियों के सीधे संपर्क में रहते हैं। इस दौरान कुल 160 आरपीएफ कर्मी, 24 जीआरपी जवान, 25 वाणिज्य विभाग कर्मचारी, 10 वेंडर, 08 कुली एवं 03 पुलिस कर्मी उपस्थित रहे।

समन्वय मजबूत करने पर जोर

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेलवे परिसर में कार्यरत सभी एजेंसियों एवं फ्रंटलाइन कर्मियों को मानव तस्करी के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाना था। साथ ही इस अपराध पर रोक लगाने के लिए रेलवे विभागों, सुरक्षा एजेंसियों और सामाजिक संगठनों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

रेल प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे ताकि रेलवे परिसर को महिलाओं और बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित बनाया जा सके और मानव तस्करी जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।