वित्त वर्ष 2025-26 में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने रचा नया कीर्तिमान

वित्त वर्ष 2025-26 में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने रचा नया कीर्तिमान

प्रमुख उपलब्धियों के साथ 100% विद्युतीकरण की ओर तेज़ी से अग्रसर एनएफआर

गुवाहाटी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रेल ट्रैक विद्युतीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करते हुए 100 प्रतिशत विद्युतीकरण की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। यह उपलब्धि न केवल पूर्वोत्तर भारत में आधुनिक रेल परिचालन को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और परिचालन क्षमता में वृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

एनएफआर द्वारा किया जा रहा विद्युतीकरण अभियान भारतीय रेलवे के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत पूरे नेटवर्क में कार्बन उत्सर्जन कम करने, डीजल पर निर्भरता घटाने तथा रेल संचालन को अधिक किफायती, तेज़ और विश्वसनीय बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने अपने अधिकार क्षेत्र में कुल 1342.18 रूट किलोमीटर (आरकेएम) तथा 1828.42 ट्रैक किलोमीटर (टीकेएम) का विद्युतीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस विद्युतीकरण कार्य में असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश के कई महत्वपूर्ण रेलखंड शामिल हैं। इस व्यापक प्रगति से पूर्वोत्तर और आसपास के क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत आधार मिला है और इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के जरिए निर्बाध रेल संचालन का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

एनएफआर के सभी मंडलों में विद्युतीकरण कार्य को गति मिली है। तिनसुकिया मंडल इस वर्ष सबसे अधिक प्रदर्शन करने वाला मंडल रहा, जहां 663.59 आरकेएम और 855.48 टीकेएम का विद्युतीकरण किया गया। यह कुल वार्षिक विद्युतीकरण का लगभग 50 प्रतिशत है। तिनसुकिया मंडल में मरियानी-शिमलगुड़ी, शिमलगुड़ी-डिब्रूगढ़, दुलियाजान-न्यू तिनसुकिया और नॉर्थ लखीमपुर-धमालगांव जैसे महत्वपूर्ण रूटों का विद्युतीकरण किया गया है, जो ऊपरी असम में यात्री एवं माल परिवहन दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

इसके बाद रंगिया मंडल ने 348.92 आरकेएम और 535.43 टीकेएम का विद्युतीकरण कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। इसमें रंगापाड़ा-हारमती तथा हारमती-नाहरलगुन जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेलखंड शामिल हैं, जिससे अरुणाचल प्रदेश की ओर रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हुई है।

वहीं लामडिंग मंडल में 124.70 आरकेएम और 197.38 टीकेएम का विद्युतीकरण किया गया। इसमें त्रिपुरा का महत्वपूर्ण अगरतला-सबरूम सेक्शन भी शामिल है, जो पूर्वोत्तर के दक्षिणी भाग में रेल संपर्क विस्तार में अहम भूमिका निभा रहा है।

इसके अतिरिक्त कटिहार मंडल ने 108.62 आरकेएम और 130.83 टीकेएम तथा अलीपुरद्वार मंडल ने 96.36 आरकेएम और 109.30 टीकेएम का विद्युतीकरण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन मंडलों के माध्यम से बिहार एवं उत्तर बंगाल के कई आवश्यक रेलखंडों का विद्युतीकरण पूरा किया गया है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन सेक्शनों के विद्युतीकरण से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, परिचालन लागत और रखरखाव खर्च घटेगा तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से ट्रेनों की गति, समयपालन और विश्वसनीयता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे क्षेत्र में लाइन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ अधिक ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी विकसित होंगी।

एनएफआर ने अब तक कुल मिलाकर लगभग 4170.19 रूट किलोमीटर (आरकेएम) और 6690.38 ट्रैक किलोमीटर (टीकेएम) का विद्युतीकरण कार्य पूरा कर लिया है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पूरे जोन में विद्युतीकरण कार्य को और तेजी से आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य को जल्द हासिल किया जा सके।