PWD ने कहा- "हमने नहीं दी मंजूरी", फिर किसके आदेश पर खुला हाईवे पर पेट्रोल पंप?

Amit dashora/ मनोहर वैष्णव

चित्तौड़गढ़ । जिले के कपासन रोड स्थित खेड़ी क्षेत्र में नियमों को धता बताकर एक पेट्रोल पंप को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने का एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। यह मामला न केवल प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के साथ किए गए एक बड़े खिलवाड़ की ओर भी इशारा कर रहा है। बिना किसी तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन के आनन-फानन में दी गई यह मंजूरी अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गहरे सवालिया निशान खड़े कर रही है। आरोप है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल सुरक्षा मानकों की बलि दी, बल्कि चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी फाइलों में हेरफेर कर नियमों की नई इबारत लिख दी । सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग और व्यस्त जंक्शन के समीप संचालित इस पंप के लिए लोक निर्माण विभाग (लोक निर्माण विभाग) की अनिवार्य तकनीकी रिपोर्ट तक नहीं ली गई। इसके बावजूद जिला कलेक्टर कार्यालय से एनओसी का जारी होना एक गहरी साजिश और भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। इस मामले की गूंज अब जयपुर के गलियारों तक पहुंच गई है, जहां मुख्यमंत्री कार्यालय और कार्मिक विभाग को भेजी गई शिकायतों ने स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बताया जा रहा है कि पेट्रोल पंप जंक्शन और व्यस्त ट्रैफिक क्षेत्र के बेहद पास स्थित है, जिससे भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। साथ ही, भूमि उपयोग (लैंड यूज) और दस्तावेजों में भी अनियमितताओं की बात सामने आई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि को शहरी क्षेत्र दर्शाकर गलत तरीके से लाभ दिलाया गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृति प्राप्त की गई। मामले में निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।


"कोई तकनीकी जांच नहीं हुई" PWD का लिखित खुलासा !
सबसे चौंकाने वाला तथ्य सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशाषी अभियंता द्वारा आरटीआई के जवाब में सामने आया है। विभाग ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि सोमनाथ फिलिंग स्टेशन हेतु उनके कार्यालय द्वारा आज तक न तो कोई तकनीकी जांच प्रतिवेदन भेजा गया है और न ही कोई एनओसी (NOC) जारी की गई है । बावजूद इसके, पंप का संचालन धड़ल्ले से जारी है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है ?।

तत्कालीन SDM की भूमिका और 'हितों का टकराव' !
शिकायतकर्ता रामावतार ने गंभीर आरोप लगाया है कि तत्कालीन उपखंड अधिकारी (SDM) ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने परिजनों को लाभ पहुँचाया है ?। शिकायत के अनुसार ।
शहरी क्षेत्र का फर्जीवाड़ा । ग्रामीण क्षेत्र की जमीन को नगर विकास न्यास (UIT) में 'शहरी क्षेत्र' दिखाकर नियमों में शिथिलता प्राप्त की गई ?।
जांच प्रभावित करने का आरोप । वर्तमान में संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण पुनः चित्तौड़गढ़ UIT में भूमि अधिग्रहण अधिकारी के पद पर होना 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) को जन्म दे रहा है, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका है ?।

सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी !
शिकायत में सड़क सुरक्षा को लेकर डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं । यह पंप ग्रेड सेपरेटर से मात्र 85 से 140 मीटर की दूरी पर स्थित है जिसमें दूरी के नियम टूटे है ?। एनएचएआई और आईआरसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जंक्शन और ग्रेड सेपरेटर के इतने पास पेट्रोल पंप होना भविष्य में किसी भी बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकता है ?।

"संपर्क पोर्टल" पर भी शिकायतों का अंबार !
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर संभागीय आयुक्त तक गुहार लगाई है ?। राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों (परिवाद संख्या: 112507124818761 एवं अन्य) में बार-बार विभाग द्वारा एनओसी न होने की बात कही गई है, लेकिन अभी तक पंप को सील करने जैसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है ?।