धुरी स्टेशन पर यांत्रिक इंटरलॉकिंग से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में परिवर्तन – अंबाला मंडल

अम्बाला। रेलवे सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल द्वारा धुरी स्टेशन पर विद्यमान यांत्रिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को प्रतिस्थापित करते हुए अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया गया है।

नव-स्थापित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली एक माइक्रोप्रोसेसर आधारित, फेल-सेफ प्रणाली है, जिसे आरडीएसओ द्वारा अनुमोदित मानकों के अनुसार स्थापित किया गया है। यह प्रणाली उच्च स्तर की सुरक्षा, विश्वसनीयता एवं परिचालन दक्षता सुनिश्चित करती है। इस उन्नयन के पश्चात धुरी स्टेशन पर सिग्नल एवं पॉइंट संचालन अब इलेक्ट्रॉनिक रूप से नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे मार्ग निर्धारण अधिक त्वरित एवं त्रुटिरहित हो गया है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कार्यों के निष्पादन के दौरान, धुरी (DUI) से जुड़े चार स्टेशनों की ब्लॉक कार्यप्रणाली को भी उन्नत किया गया है। विद्यमान ब्लॉक प्रणाली को यूनिवर्सल फेल सेफ ब्लॉक इंटरफेस (UFSBI) से प्रतिस्थापित किया गया है, जिससे संबंधित सेक्शन में ट्रेन संचालन की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता में और वृद्धि हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, UFSBI एवं अग्नि सुरक्षा संवर्धन के प्रमुख लाभ

फेल-सेफ इलेक्ट्रॉनिक लॉजिक, इंटरलॉकिंग तथा अग्नि सुरक्षा प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षा में वृद्धि

तेज मार्ग निर्धारण एवं शीघ्र ब्लॉक क्लीयरेंस द्वारा परिचालन दक्षता में सुधार

परिचालन प्रतिबंधों में कमी के कारण समयपालन में सुधार

आधुनिक ब्लॉक इंटरफेस एवं संरक्षित रिले इंस्टॉलेशन के कारण प्रणाली की विश्वसनीयता में वृद्धि

सुचारु एवं सुरक्षित ट्रेन संचालन के माध्यम से सेक्शन की वहन क्षमता में वृद्धि

धुरी स्टेशन पर यांत्रिक इंटरलॉकिंग से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में परिवर्तन, ब्लॉक कार्यप्रणाली के UFSBI में उन्नयन तथा आधुनिक अग्नि शमन प्रणालियों की स्थापना, भारतीय रेल द्वारा सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण एवं पुरानी प्रणालियों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। यह पहल अंबाला मंडल में अधिक सुरक्षित, तेज एवं दक्ष ट्रेन परिचालन में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

धुरी स्टेशन पर यार्ड री-मॉडलिंग कार्य पूर्ण होने के उपरांत यार्ड की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पूर्व में धुरी यार्ड में केवल 6 रनिंग लाइनें उपलब्ध थीं, जबकि यार्ड री-मॉडलिंग के पश्चात रनिंग लाइनों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जिससे यातायात संचालन क्षमता एवं परिचालन लचीलापन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।