चंदौली: सरकारी पगार पूरी, सेवा आधी! डिप्टी सीएमओ चला रहें है निजी अस्पताल 

चंदौली। जनपद में डिप्टी सीएमओ पद पर तैनात एक वरिष्ठ चिकित्साधिकारी पर सरकारी सेवा नियमों की गंभीर अनदेखी का मामला सामने आया है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी वाराणसी (बनारस) में निवास करते हैं और प्रतिदिन वहीं से मुगलसराय स्थित अपने निजी अस्पताल जाकर निजी प्रैक्टिस करते हैं। इसके बाद औपचारिकता निभाते हुए सीमित समय के लिए सरकारी कार्यालय या स्वास्थ्य सेवाओं में उपस्थिति दर्ज कराते हैं जबकि सरकार से उन्हें पूर्ण वेतन और सभी भत्ते निर्बाध रूप से मिल रहे हैं।

सरकारी पद को निजी लाभ का साधन बनाने का उदाहरण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (आचरण) नियमावली, 1956 के नियम 15 के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना अनुमति निजी व्यवसाय या अस्पताल संचालन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद प्रशासनिक पद पर रहते हुए निजी अस्पताल चलाना खुला नियम उल्लंघन है।

सरकारी वेतन पूर्णकालिक सेवा के लिए दिया जाता है न कि निजी अस्पताल से समय निकालकर की गई उपस्थिति के लिए। ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्राथमिकता निजी प्रैक्टिस है तो सरकारी खजाने से पूरी पगार किस सेवा के बदले ली जा रही है।

नियमों के अनुसार दोष सिद्ध होने पर निलंबन वेतन वसूली से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है लेकिन अब तक विभागीय चुप्पी संरक्षण और लापरवाही की ओर इशारा कर रही है।